''ईशा शर्मा'' के चक्कर में फंसकर ISI को देने लगा गोपनीय जानकारी, राजस्थान से दबोचा गया

Amanat Ansari 11 Oct 2025 12:39: PM 2 Mins
''ईशा शर्मा'' के चक्कर में फंसकर ISI को देने लगा गोपनीय जानकारी, राजस्थान से दबोचा गया

नई दिल्ली: राजस्थान इंटेलिजेंस ने अलवर के एक निवासी को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी 1923 के ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत हुई. कई खुफिया एजेंसियों की लंबी निगरानी और जांच के बाद यह कार्रवाई की गई. अधिकारियों के अनुसार, आरोपी मंगल सिंह करीब दो साल से पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में था.

जांच में पता चला कि वह संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर कर रहा था. इसमें अलवर आर्मी कैंटोनमेंट और इलाके के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों का विवरण शामिल था. यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा है, इसलिए रक्षा और सुरक्षा की दृष्टि से बहुत संवेदनशील माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजस्थान इंटेलिजेंस राज्य भर में रणनीतिक स्थलों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही है.

अलवर कैंटोनमेंट इलाके में निगरानी के दौरान मंगल सिंह की हरकतें संदिग्ध लगीं, जिससे गहन जांच शुरू हुई. इंटेलिजेंस डीआईजी राजेश मीठल ने कहा, "सिंह ने अपनी गिरफ्तारी तक हैंडलर्स के साथ सैन्य जानकारी शेयर की. वह दो पाकिस्तानी नंबरों से नियमित संपर्क में था और बड़ी रकम पैसे प्राप्त कर चुका था. अब हम इन लेन-देन के वित्तीय रास्तों की तलाश कर रहे हैं."

जांच से पता चला कि मंगल सिंह को एक पाकिस्तानी महिला एजेंट ने हनीट्रैप में फंसाया था. वह सोशल मीडिया पर ईशा शर्मा नाम से सक्रिय थी. भावनात्मक चालाकी और पैसे के लालच से उसने सिंह का भरोसा जीता और गोपनीय सैन्य जानकारी हासिल की. सिंह दो पाकिस्तानी नंबरों से जुड़ा था. एक हनीट्रैप से और दूसरा पाकिस्तान में रहने वाले हैंडलर्स से. उनके संपर्क में सिंह को गोपनीय जानकारी के बदले भारी पैसे ट्रांसफर किए गए.

10 अक्टूबर को उसके मोबाइल फोन और डिजिटल कम्युनिकेशन की गहन तकनीकी जांच के बाद गिरफ्तारी हुई. जयपुर के स्पेशल पुलिस स्टेशन में 1923 के ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया. सीआईडी इंटेलिजेंस राजस्थान ने उसे हिरासत में लिया. फिलहाल वह जयपुर के सेंट्रल इंटरोगेशन सेंटर में पूछताछ कर रहा है. खुफिया अधिकारी कहते हैं कि पूछताछ से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं.

प्रारंभिक जांच बताती है कि सिंह ने न सिर्फ सैनिकों की आवाजाही और कैंटोनमेंट का लेआउट, बल्कि बड़े रणनीतिक प्लान और इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी भी शेयर की हो सकती है. एजेंसियां डेटा लीक की पूरी सीमा का आकलन कर रही हैं और यह देख रही हैं कि क्या कोई और व्यक्ति जासूसी नेटवर्क में शामिल था. जांच में शामिल एक खुफिया अधिकारी ने कहा, "उसकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा थीं.''

अब अधिकारी एनसीआर और उसके बाहर जासूसी गतिविधियों के अन्य संभावित लिंक तलाश रहे हैं. सिंह से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच हो रही है, ताकि पता चले कि आईएसआई ने पैसे कैसे ट्रांसफर किए और क्या उसके कोई साथी भारत के अंदर या बाहर थे. मंगल सिंह हिरासत में है, और जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई होगी.

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