अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब मंदिर ट्रस्ट और निर्माण व्यवस्था से जुड़े बड़े चेहरों के बीच अंदरूनी मतभेद तक पहुंचता दिख रहा है. एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम आरोपियों में नहीं होने और उन्हें क्लीनचिट मिलने के बाद उन्होंने 9 पन्नों का बयान जारी कर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सीधे सवाल खड़े किए.
चंपत राय ने अपने बयान में दावा किया कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े अहम फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की निर्णायक भूमिका थी. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण समिति में मिश्रा अपनी सुविधा के अनुसार लोगों को जोड़ते थे और कई फैसले उनकी सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ते थे. हालांकि, ये चंपत राय के दावे हैं और इन पर नृपेंद्र मिश्रा की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
विवाद की शुरुआत चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी से हुई. ट्रस्ट से जुड़े घटनाक्रम के मुताबिक 4 जून की रात चोरी का पता चला और अगले दिन सीसीटीवी फुटेज खंगालकर संदिग्धों की पहचान की गई. पुलिस के मुताबिक करीब 80 लाख रुपये की रकम आरोपियों से बरामद हुई. ट्रस्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग भी की थी.
इसके बाद चंपत राय ने अपनी चिट्ठी में गिनती की सुरक्षा व्यवस्था, बैंकिंग नियमों और सीसीटीवी समेत कई सवाल उठाए थे.
उन्होंने कहा था कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन नहीं हुआ. बाद में उन्होंने पद से इस्तीफा भी दिया, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया. अब एसआईटी की रिपोर्ट के बाद चंपत राय का खुलकर सामने आना इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे रहा है. वहीं नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय के पत्र पर कहा है कि उन्होंने पत्र देखा ही नहीं और विवाद पैदा करने वाली अफवाहों से बचने की बात कही है.