हाल ही में कांग्रेस (Congress) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत (Ramniwas Rawat) को मध्य प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Sarkar) की तरफ से उन्हें मंत्री मनाया गया है. इसी के साथ रामनिवास रावत ने मंत्री पद की शपथ भी ले ली है. मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) का यह दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार था, जिसमें रामनिवास को कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि शपथ के दौरान कुछ कन्फ्यूजन देखने को मिली जो अब चर्चा का विषय बन गया है.
दरअसल, रामनिवास रावत को 15 मिनट के अंतर दो बार शपथ लेनी पड़ गई, जिसकी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है. रावत को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेनी थी, लेकिन उन्होंने पहले मध्य प्रदेश के राज्य मंत्री की शपथ ले ली. इसके 15 मिनट के बाद उन्होंने दोबारा मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल (Governor Mangu Bhai Patel) के सामने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली. शपथ के बाद राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने रामनिवास रावत को बधाई दी है.

सीएम मोहन यादव (Mohan Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि आज राजभवन में महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल जी की गरिमामयी उपस्थिति में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार (Madhya Pradesh Cabinet Expansion) हेतु आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सहभागिता की. महामहिम राज्यपाल जी ने श्री रामनिवास रावत जी को मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. मैं उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के पूर्व नेता रामनिवास रावत की x पर तस्वीरें भी साझा की.
मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि रामनिवास अबतक कुल 6 बार विधायक बन चुके हैं और इस समय वह मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभी सीट से विधायक हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रामनिवास रावत के बीजेपी (BJP) में शामिल होने और मंत्री बनाए जाने से पार्टी की ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ और मजबूत होगी, क्योंकि रावत ओबीसी (OBC) समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं.
हालांकि राजनीतिक जानकारों ने यह भी दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस कदम से भाजपा के कट्टर समर्थक नाराज हो सकते हैं. इसके पीछे तर्क यह है कि जो, कार्यकर्ता वर्षों से पार्टी को सेवा देते आ रहे हैं पहले उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए था. बता दें कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में अन्य पार्टियों के नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं, जिसे पार्टी ने बड़ी-बड़ी जिम्मेदारी भी दी है. वहीं ओबीसी वोट बैंक (OBC Vote Bank) पर पकड़ की बात पर जानकार कहते हैं कि मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे भी यही स्ट्रेटजी थी.