एक बार फिर अखिलेश यादव के करीबी नेताओं ने समाजवादी पार्टी के दोहरे चरित्र की पोल खोल कर रख दी है... एक तरफ अखिलेश यादव खुद को महादेव का भक्त बताते हैं, भगवान परुषराम का फरसा उठाते हैं... श्री राम के सिद्धांतों की बातें करते हैं... लेकिन दूसरी तरफ वो भगवान राम का आपमान करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को संरक्षण भी देते हैं... जो स्वामी प्रसाद मौर्य सनातन को गाली देते, श्रीराम चरित मानस की प्रतियों को जलाने की कोशिश करते... मंदिरों का अपमान करते थे... उन्हें अखिलेश यादव की सपा ने संरक्षण दिया था... इसी गलती की वजह से अखिलेश 2022 में दोबारा सीएम बनने से चूके,,, और योगी आदित्यनाथ ने यूपी में लगातार दो बार CM बनकर इतिहास रच डाला था... 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव को एक और स्वामी प्रसाद मौर्य मिल चुके हैं... जिनका नाम है राजकुमार भाटी... खुद को पश्चिम यूपी का बहुत बड़ा नेता समझने वाले राजकुमार भाटी 2027 के चुनाव से पहले सपा को गर्त में लेजाने वाले सारे काम कर रहे हैं... कभी स्वामी प्रसाद की तरह ब्राह्मणों को गाली देते हैं, तो कभी जाट-गुर्जर समाज की बेटियों पर फब्तियां कसते हैं... पहले वो बयान सुनिए जिसमें बेशर्मी के साथ राजकुमार भाटी ने ब्राह्मण समाज का अपमान किया है...
ये कोई एक बयान नहीं है... इससे पहले भी राजकुमार भाटी भगवान राम की तुलना मोहम्मद साहब के साथ कर चुके हैं... जहां वो सिर्फ तुलना ही नहीं करते... बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम में कमियां गिनाते हैं... मोहम्मद साहब को समाज के लिए प्रेरणा बताते हैं...
‘हिंदुओं के भगवान श्रीराम में अनेक अवगुण हैं, जब कि मोहम्मद साहब में हमें गुण ही गुण दिखाई देते हैं’- राजकुमार भाटी का बयान
अखिलेश यादव की नाव में छेद करने वाले नेताओं में राजकुमार भाटी की गिनती इसलिए भी होती है... क्योंकि कहा जाता है कि 2027 में पश्चिम यूपी को जीतने के लिए अखिलेश इन्हीं के ऊपर भरोसा किए बैठे हैं... बताया जाता है कि जब अखिलेश यादव ने दादरी में सपा का दम दिखाने के लिए रैली का आयोजन कियी तो इस रैली के पीछे राजकुमार भाटी का ही हाथ था.... मुलायम सिंह के समय जिस तरह से आजम खान खुद को पश्चिम का सीएम समझते थे उसी तरह राजकुमार भाटी ने भी अपने आप को पश्चिम में अखिलेश के बाद सपा का दूसरा चेहरा समझना शुरू कर दिया है... यही वजह है कि दादरी में जिन जाट-गुर्जरों को साधने के लिए अखिलेश यादव ने रैली कर बीजेपी को चुनौती देने की कोशिश की थी... उसी जाट-गुर्जर समाज की बहन-बेटियों के चरित्र का हनन राजकुमार भाटी कर देते हैं... बिना किसी सत्ता के भी उनकी हनक इस कदर बढ़ जाती है कि अपने बयान के बाद बेशर्मी से हंसते भी हैं...
राजकुमार भाटी के इस बयान के बाद चर्चा ये चलने लगी है कि अखिलेश यादव नाराज हैं.. उन्हें चुनाव से पहले ही 2027 के चुनाव में पश्चिम का विरोध दिखने लगा है.... अंदरखाने की चर्चा तो ये भी है कि अगर भाटी के बयान नहीं रुके तो उन्हें समाजवादी पार्टी से गेट आउट वाला मैसेज भी मिल सकता है,,, क्योंकि अखिलेश नहीं चाहते जो काम स्वामी प्रसाद ने 2022 में उनके साथ किया वही काम राजकुमार भाटी 2027 में उनके साथ करें... अपने विवादित बयानों की वजह से ही स्वामी प्रसाद मौर्य को सरेआम सड़क पर सुरक्षाकर्मियों के बीच कंटाप जड़ा गया था... अब जाट-गुर्जर और ब्राह्मण समाज भी राजकुमार भाटी के खिलाफ खुलकर आ चुका है... जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये चर्चाएं भी हैं कि स्वामी प्रसाद वाला इलाज भाटी के साथ भी हो सकता है