संदीप शर्मा
बीजेपी के 2 फैसले ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर एक वर्ग की राजनीति करने वालों की खटिया खड़ी कर दी. जिन लोगों ने आज तक धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देकर सनातनियों को एक किनारे पर खड़ा कर रखा था और मुस्लिमों को एक खास जगह दे रहे थे. ये फैसले उनकी राजनीति को ही खत्म कर सकते हैं, जो अब बीजेपी ने अपने तीसरे कार्यकाल में लेना शुरू किया है. उन फैसलों पर बात करते हैं लेकिन उससे पहले आपको वो दिखाते हैं जो मोदी सरकार मुसलमानों के लिए कर रही है असके बाद फिर विपक्ष का वो मुस्लिम प्रेम दिखाते हैं, जिसमें दशकों से टोपीवालों को ही टोपी पहनाई जा रही है.
पहले बात करते हैं कि भारत सरकार मुसलमानों के लिए क्या क्या कर रही है. मोदी सरकार ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों के लिए 15 सूत्री कार्यक्रम तैयार किए हैं, जिससे की उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके.
उड़ान योजना- केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, इस योजना के तहत मुस्लिम छात्र छात्राओं को प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए फ्री कोचिंग व्यवस्था उपलब्ध कराती है. इस स्कीम के तहत घर में रहकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले मुसलमान छात्र छात्राओं को 1500 रुपए और बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को 3000 रुपए भी दिए जाते हैं.
शादी शगुन योजना- देश में मुस्लिम लड़कियों में भी उच्च शिक्षा देने के मकसद से केंद्र कि मोदी सरकार, इस योजना के तहत ग्रेजुएशन करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 51000 रुपये की राशि शादी शगुन के तौर पर देने का काम कर रही है.
उस्ताद योजना- केंद्र की मोदी सरकार की इस योजना के तहत मुस्लिम कारीगरों को और ज्यादा एक्सपर्ट बनाने के लिए उन्हें ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है.
सीखो और कमाओ योजना- नरेंद्र मोदी की सरकार ने मुस्लिम युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से इस स्कीम को शुरू किया
ईदी योजना- केंद्र की मोदी सरकार के इस योजना के तहत 5 करोड़ मुस्लिम छात्र छात्राओं को 'प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति' देने का फैसला लिया.
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने मुसलमानों के लिए सऊदी अरब से आग्रह कर न सिर्फ हज का कोटा बढ़वाया बल्कि उस पर लगने वाली जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया. इसके अलावा नरेंद्र मोदी की सरकार ने ही 6 लाख से अधिक वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियों के कागजातों का डिजिटलीकरण करवाने का काम किया है.
इन सब योजनाओं का फायदा किस वर्ग के लोगों को मिल रहा है? इसके अलावा जितनी भी योजनाएं हैं जैसे उज्जवला योजना, अंत्योदय अन्न योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना उन सबमें भी इनकी ही भागीदारी ज्यादा है. लेकिन देश के विपक्षी पार्टियां, कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के साथ मिलकर देश के गरीब मुसलमानों को मोदी, योगी और बीजेपी के खिलाफ भड़काती हैं और बीजेपी सरकार का विरोध करने पर विवश कर देती है.
मैं उन 2 फैसलों पर आउंगा जो विपक्ष की छद्म धर्मनिरपेक्षता वाली राजनीति को हमेशा के लिए खत्म कर देगी. उससे पहले थोड़ा विपक्ष के मुस्लिम प्रेम पर भी बात कर लेना जरूरी है. आखिर आज तक इन्होंने मुस्लिम समुदाय के विकास के लिए किया क्या है? आजादी के बाद से ही कांग्रेस लगातार करीब करीब 60-65 सालों तक सत्ता में रही. इन 6-7 दशकों में बाकियों का तो छोड़ो मुसलमानों के विकास के लिए कांग्रेस ने ऐसा कौन सा काम कर दिया सिवाए उनकी जनसंख्या विकास में मदद करने के, चाहे वो घुसपैठ के जरिए हो या फिर रिफ्यूजी के रूप में शरण देकर या फिर जनसंख्या नियंत्रण में उनको भागीदार न बनाकर.
कांग्रेस हों या सपा या फिर अन्य क्षेत्रीय पार्टियां जैसे टीएमसी जो मुस्लिम प्रेम दिखाती आईं हैं उनमें से किसी ने मुस्लिम हित के लिए या उनके विकास के लिए नहीं दिखाईं बल्कि उनको एक वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने के लिए झूठा प्रेम दिखाया है सबने. उसके कई उदाहरण आपके सामने हैं. अगर सच्चा प्रेम होता तो जिस रफ्तार से मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ी है इस देश में क्या उस स्तर से उनकी शिक्षा, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति बढ़ पाई? नहीं, क्योंकि कांग्रेस या अन्य सत्ता लोलुप पार्चियों का कभी ये मकसद ही नहीं था और अभी भी नहीं है.
अब जो मोदी-योगी विरोध में मुसलमानों को इकट्ठा करने का प्रयास चल रहा है, उनके बीच झूठा भ्रम फैलाकर उन्हें बीजेपी के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश है कि बीजेपी संविधान बदल देगी, मुसलमानों को भगा देगी या उनके अधिकार छीन लेगी और इसमें बहुत हद तक सफलता भी इन्हें मिली है. इसके बाद अब बीजेपी को भी ये समझ आ गया है कि अब खुल कर खेलने का समय है. एक पीएम या सीएम के रूप में मोदी-सीएम ने हमेशा सबका साथ, सबका प्रयास और सबका विकास की बात की लेकिन उसपर विपक्ष का झूठा प्रोपेगेंडा भारी पड़ा.
पीएम मोदी हों या सीएम योगी या राज्य की कोई भी सरकारें जब कोई जनहित की योजना लाती हैं तो उसका फायदा हर वर्ग के लोगों को मिलता है. पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया तो उसका सबसे ज्यादा फायदा वहां की जनता को मिला और वहां की जनता सबसे ज्यादा किस वर्ग से है. आज वहां का पर्यटन या फिर और व्यवसाय बढ़ रहा है. देश के विभिन्न प्रांतों से लोग जाकर इनवेस्ट कर रहे हैं, या फिर वहां की युवा, छात्र और व्यवसायी भारत की मुख्यधारा के साथ जुड़ रहे हैं तो किसका फायदा हो रहा है.
जब पीएम मोदी ने तीन तलाक को खत्म किया तो किस वर्ग की औरतों को उसका फायदा मिला. इन सब बातों से ही सीखकर बीजेपी अब फिर से अपने मूल मुद्दों, मूल विचारधारा पर वापस लौट रही है. जो योजनाएं सबके लिए है वो तो चलती ही रहेंगी लेकिन अब सनातन, हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद ही मूल मुद्दा रहेगा और इसीलिए योगी का नेमप्लेट वाला फैसला के बाद मोदी का RSS पर लगा प्रतिबंध हटाने वाला फैसला आय़ा और अब योगी का नजूल भूमि विधेयक तो मोदी वक्फ बोर्ड कानून में सुधार को लेकर विधेयक लेकर आई है.
इन फैसलों से मोदी, योगी और बीजेपी भारत की जनता और विपक्ष को ये साफ संदेश देना चाहते हैं कि देश और प्रदेश के विकास के लिए जो भी फैसले लेने होंगे वो लेंगे चाहे वो किसी भी धर्म विशेष से जुड़े हों. वो ये देख कर फैसले नहीं करेंगे कि इससे मुसलमानों का वोट खिसक जाएगा. वो राहुल गांधी की तरह बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं पर चुप्पी साध कर नहीं बैठेंगे कि मुस्लिम वोटर्स नाराज हो जाएगा. वो अखिलेश की तरह वोट के लिए दुष्कर्म के आरोपी मोइद के समर्थन में नहीं उतर जाएंगे कि मुस्लिम वोटर्स नाराज हो जाएगा.
वो ममता की तरह बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के समर्थन में खड़े नहीं हो जाएंगे कि मुस्लिम वोटर्स नाराज हो जाएगा. वो कांग्रेस की तरह आधी रात में आतंकियों की फांसी रूकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएंगे कि मुस्लिम वोटर्स नाराज हो जाएगा. अब बीजेपी ये मान कर चल रही है कि वो उसी विचारधारा के रास्ते पर चलेगी जो उसके मूल में है, जिसके साथ वो खड़ी हुई है, बड़ी हुई है और अब खुलकर एक देश एक कानून, जनसंख्या नियंत्रण कानून जैसे मुद्दे पर बात होगी. घुसपैठियों को बाहर करने, भ्रष्टाचारियों पर ED, CBI का शिकंजा और बढ़ेगा.