Shambhu Girls Hostel Case: पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही जहानाबाद निवासी एक छात्रा की मौत को लेकर पुलिस प्रशासन पर बड़ा खुलासा हुआ है. शुरुआत में पटना पुलिस ने इस घटना को दवाओं के अधिक सेवन से हुई सामान्य मौत बताया था, लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के शुरुआती निष्कर्षों ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना जताई गई है, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
घटना के बाद से ही छात्रा के परिजन इसे सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला बताते आ रहे थे. लेकिन पुलिस और कुछ वरिष्ठ अधिकारी इसे बीमारी और नींद की गोलियों की लत से जोड़कर देखने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस की ओर से कहा गया था कि छात्रा की यूरिन सैंपल से भी नींद दवा की पुष्टि हुई है और गूगल सर्च हिस्ट्री से भी पुष्टि हुई कि छात्रा नींद की गोली और साइनाइड सर्च कर रही थी. लेकिन अब पोस्टमार्टम से सामने आए तथ्यों ने पुलिस के दावे को खोखला कर दिया.
घटना वाले दिन जब छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया था, तब भी परिजनों ने यौन हिंसा की बात कहकर विरोध प्रदर्शन भी किया था, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उस समय उनके आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. यहां तक कि पटना के एसएसपी ने भी सार्वजनिक रूप से यौन हिंसा की आशंका को नकार दिया था. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद पुलिस के इन बयानों पर सवाल उठने लगे हैं.
सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस ने छात्रा की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान क्यों और किसके कहने पर दिए. पुलिस ने अब जाकर शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया है, लेकिन पीड़िता के परिजन और अन्य लोग बार-बार मांग कर रहे थे कि मामला यौन हिंसा का है तो, उस समय पुलिस ने कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की.
परिजन अब इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग कर रहे हैं. साथ ही वे उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई चाहते हैं, जिन्होंने मामले को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश की. इस छात्रा को न्याय दिलाने के लिए बिहार में सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है, जिससे यह मामला सरकार के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है.