नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बीजेपी-एनडीए के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. उन्होंने घोषणा की है कि राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर 'गौभक्त' निर्दलीय उम्मीदवार उतारेंगे. इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों के समर्थन में वे खुद चुनावी रणभूमि में उतरकर प्रचार भी करेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ये उम्मीदवार जीत न पाएं, लेकिन वोटों का कुछ हिस्सा काट लेने से महागठबंधन को फायदा मिल सकता है. याद रहे, पिछले चुनाव में 11 सीटों पर विजेता का फैसला 1000 वोटों के बेहद कम अंतर से हुआ था. बिहार की राजनीति में एनडीए और महागठबंधन के बीच जोरदार टक्कर की उम्मीद है. पहले चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार सभी सीटों पर उतारकर जेडी-यू को खासी परेशानी दी थी. इस बार तेजस्वी यादव की आरजेडी और कांग्रेस की नींद हराम हो रही है.
ऐसे में दोनों पक्ष चाल-बाजियों का खेल खेल रहे हैं. इसी सिलसिले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौभक्तों को निर्दलीय योद्धा के रूप में मैदान में उतारने का फैसला सुनाया है. वे वर्तमान में बिहार में 'गौ मतदाता संकल्प यात्रा' चला रहे हैं, जो गौ रक्षा के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रही है.
बेतिया के गुरवलिया में अपने इस कदम का खुलासा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की मजबूती गौ माता की सुरक्षा से ही जुड़ी हुई है. गौ रक्षा महज धार्मिक भावना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक नींव का अभिन्न अंग है. उन्होंने बताया कि उन्होंने सभी राष्ट्रीय पार्टियों से गुजारिश की थी कि संसद में गौ माता को 'राष्ट्र माता' का दर्जा देने का प्रस्ताव लाएं, लेकिन किसी ने भी इस पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया. इसलिए ही वे आगामी चुनाव में हर सीट पर गौभक्त उम्मीदवारों को उतार रहे हैं.
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि नामांकन के बाद उम्मीदवारों की पूरी सूची जारी होगी और वे व्यक्तिगत रूप से उनके पक्ष में प्रचार करेंगे. उन्होंने सनातनी समाज से आह्वान किया कि वोट केवल वही दें, जो गौ रक्षा के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता दिखाएं. बता दें, द्वारका शारदा पीठ के इस शंकराचार्य अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में छाए रहते हैं. हाल ही में बिहार भ्रमण के दौरान एक पत्रकार से उनकी तीखी बहस हो गई थी.
उन्होंने 'आई लव मुहम्मद' विवाद को असली मुद्दों से भटकाने की साजिश करार दिया था. महाराष्ट्र चुनाव के समय भी उन्होंने गौ माता संकल्प यात्रा आयोजित की थी, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गाय को 'राज्य माता' घोषित करने का वादा किया था.