3 मिनट में 3 टीम ने कैसे किया डेढ़ करोड़ का खेल, CCTV फुटेज देख योगी की पुलिस भी चकराई

Global Bharat 05 Sep 2024 04:15: PM 3 Mins
3 मिनट में 3 टीम ने कैसे किया डेढ़ करोड़ का खेल, CCTV फुटेज देख योगी की पुलिस भी चकराई

ये सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर सुल्तानपुर के इस गहने की दुकान का है, जहां से 3 मिनट में डेढ़ करोड़ का माल गायब हो जाता है. तस्वीरों में दिखता है, एक बाइक पर दो लोग और दूसरी बाइक से तीन लोग उतरते हैं. दुकान में तेज कदमों से जाते हैं, उसी में से एक बाहर निकलकर डिग्गी से बैग निकालता है, दुकान के बाहर खड़े व्यक्ति को धक्का देते हुए अंदर ले जाता है, वहां बैठे लोगों को धमकाता है, सामान अपने बैग में रखता है, और करीब 3-4 मिनट में दुकान से दो बड़ा बैग लेकर निकल जाता है.

28 अगस्त को वारदात होती है, दो दिन तक पुलिस के होश उड़े रहते हैं, दुकान मालिक के घर कभी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, तो कभी बसपा प्रदेश अध्यक्ष भरोसा दिलाने पहुंचते हैं, सपा के कई बड़े नेता भी इंसाफ की मांग करते हैं, लेकिन जब योगी की पुलिस इंसाफ करती है तो अखिलेश यादव के पेट में दर्द होने लगता है, वो ट्वीट कर लिखते हैं, जाति देखकर यूपी पुलिस ने आरोपी को ऊपर पहुंचा दिया.

3 सितंबर को तीन आरोपी पुष्पेन्द्र सिंह, लाला हरिजन और सचिन सिंह को पुलिस ऑपरेशन लंगड़ा चलाकर गिरफ्तार कर लेती है, जबकि मुख्य आरोपी विपिन सिंह ने शिकंजा कसता देख खुद ही रायबरेली कोर्ट में एक दूसरे केस में सरेंडर कर दिया. जबकि मंगेश यादव को पुलिस ने ढेर कर दिया.

ऐसा दावा किया जा रहा है कि मंगेश पुलिस से भी तेज चलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन लखनऊ से गई टीम ने जब दो दिन तक सुल्तानपुर में डेरा डाला तो मंगेश को बचाने वाले भी पीछे हट गए. लेकिन इनकी प्लानिंग जितनी तगड़ी थी अगर ये लोग नहीं पकड़े जाते तो शायद यूपी का कोई भी सर्राफा व्यापारी शांति से नहीं रह पाता. इन्होंने ठीक वैसे ही प्लान बनाया था जैसे लॉरेंस और उसके गुर्गे प्लान बनाते हैं. इस घटना में कुल 15 लोग शामिल थे, जिन्हें 3 अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया था.

15 गुर्गे, 3 ग्रुप और डेढ़ करोड़ का खेल

पहले ग्रुप का सरगना था मंगेश यादव. वो जौनपुर का इतना बड़ा हिस्ट्रीशीटर है, कि इस घटना से पहले वहीं से बाइक चोरी करता है, ताकि पुलिस पकड़ न पाए. चोरी की बाइक से ही वो इसे अंजाम देता है. दूसरे ग्रुप का सरगना था विपिन सिंह. जो अमेठी के मोहनगंज का रहने वाला था, उसी ने दुकान की रेकी की थी. 28 अगस्त के दिन ये अपने 6 गुर्गों को साथ लेकर वहीं दुकान के बाहर सड़क पर खड़ा था, ताकि पुलिस भी आती तो उसे पीछे हटने को मजबूर कर सके. तीसरे ग्रुप का सरगना था सचिन सिंह, जो 4 गुर्गों के साथ एक बोलेरो लेकर खड़ा था. इसका काम डेढ़ करोड़ के माल को सुल्तानपुर से सीधा रायबरेली पहुंचाना था.

अब सवाल ये है कि करीब 90 किलोमीटर दूर रायबरेली का लोकेशन ही इन लोगों ने माल छिपाने के लिए क्यों चुना, क्या वहां इनका कोई और सरगना बैठा था, जिस दौर में पूरे प्रदेश में इतनी सख्ती है. बुलडोजर का डर माफियाओं में इतना है कि वो खुद सरेंडर करने थाने में लाइन लगाते हैं. उस दौर में मंगेश यादव और विपिन सिंह जैसे लोग किसकी शह पर इतनी बड़ी घटना को अंजाम देते हैं. इनका आका कौन है, ये पता करना भी पुलिस के लिए जरूरी है, क्योंकि मामला अब सिर्फ इस मुकदमे या गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सियासत की एंट्री भी हो चुकी है.

अखिलेश जहां सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं सीएम योगी खुद पूछ रहे हैं कि कुर्सी बची रहे ये सोचकर माफियाओं पर कार्रवाई नहीं करने वाले क्या अब कानून व्यवस्था पर ज्ञान देंगे. पूरी इनसाइड स्टोरी विस्तार से सुनने के बाद आपको क्या लगता है, अखिलेश की अपराधियों की जाति देखने वाली राजनीति उत्तर प्रदेश के लिए सही है या बाबा की पुलिस की वो पॉलिसी जिसमें कुछ ही घंटों के भीतर ताबड़तोड़ एक्शन हो जाता है.

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