नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने देशवासियों से एक खास अपील की है. उन्होंने लोगों से कहा है कि वे डर को नजरअंदाज करें और अपनी अगली छुट्टियां कश्मीर में बिताएं. उनका मानना है कि इससे न केवल कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता और हिम्मत भी दिखेगी. सुनील ने यह बात लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2025 समारोह में कही. आइए, इस खबर को आसान भाषा में समझते हैं.
पहलगाम में हुआ आतंकी हमला
22 अप्रैल को पहलगाम के ब्यासरन घास के मैदान में आतंकियों ने एक बड़ा हमला किया. यह जगह अपनी खूबसूरती के लिए 'मिनी स्विट्जरलैंड' के नाम से मशहूर है. हमले में 26 पर्यटक मारे गए और कई लोग घायल हुए. इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया. आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया, जो वहां पिकनिक मना रहे थे या घूमने आए थे. इस घटना ने कश्मीर के पर्यटन पर भी सवाल उठाए, लेकिन सुनील शेट्टी ने इसे एक मौके के रूप में देखा और लोगों से कश्मीर जाने की अपील की.
सुनील शेट्टी का संदेश
सुनील शेट्टी ने अपने बयान में देशवासियों से एकजुट रहने और डर को हावी न होने देने की बात कही. उन्होंने कहा, "हमारे लिए इंसानियत की सेवा ही भगवान की सेवा है. भगवान सब देख रहा है और वह इसका जवाब देगा. अभी हमें भारतीयों के रूप में एकजुट रहना है. हमें उन लोगों के जाल में नहीं फंसना चाहिए जो डर और नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. हमें दिखाना है कि कश्मीर हमारा था, हमारा है और हमेशा हमारा रहेगा."
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी अगली छुट्टियां कश्मीर में बिताएं. सुनील ने कहा, "हमें एक नागरिक के तौर पर बस एक काम करना है. हमें यह तय करना है कि हमारी अगली छुट्टियां कश्मीर में होंगी और कहीं और नहीं. हमें दुनिया को दिखाना है कि हमें डर नहीं है और सचमुच हमें कोई डर नहीं है." उनका यह बयान आतंकवाद के खिलाफ हिम्मत और एकता का प्रतीक है.
कश्मीर के लिए सुनील की प्रतिबद्धता
सुनील शेट्टी ने बताया कि उन्होंने कश्मीर के अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी इच्छा जताई कि अगर जरूरत पड़ी तो वे कश्मीर जाएंगे. उन्होंने कहा, "मैंने खुद फोन करके कहा कि अगर आपको लगता है कि हमें वहां जाना चाहिए, चाहे पर्यटक के रूप में या फिर कलाकार के रूप में शूटिंग के लिए, हम जरूर आएंगे. कश्मीरी बच्चों का कोई दोष नहीं है." सुनील का यह बयान दर्शाता है कि वे न केवल कश्मीर के पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं, बल्कि वहां के स्थानीय लोगों के प्रति भी उनका सकारात्मक रवैया है.