नई दिल्ली: कोयला आवंटन घोटाले (Coal Allocation Case) में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने बुधवार (29 जुलाई 2026) को तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में उनके खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही औपचारिक रूप से बंद कर दी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें मनमोहन सिंह समेत अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दी गई थी.
कोर्ट ने विशेष अदालत के समन आदेश को भी रद्द कर दिया. प्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष जज के पास CBI की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और संज्ञान लेने का कोई आधार नहीं था. अदालत ने CBI की जांच रिपोर्ट को मानते हुए पूरे मामले को बंद कर दिया.
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था. विशेष अदालत ने पूर्व PM मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख और कुछ अन्य अधिकारियों को आरोपी के रूप में तलब किया था. हालांकि, मनमोहन सिंह ने इन आरोपों का खंडन किया था और कहा था कि आवंटन का फैसला पूरी तरह प्रशासनिक था.
सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ही इस मामले में कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. आज के फैसले के साथ लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद समाप्त हो गया है. यह फैसला कोयला घोटाला से जुड़े कई मामलों में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को अंततः क्लीन चिट मिल गई है.या केस