गर्दन में दर्द था, तांत्रिक ने पहले कपड़े उतारकर पूरे शरीर पर नींबू रगड़ा और फिर...

Amanat Ansari 20 Nov 2025 09:32: PM 1 Mins
गर्दन में दर्द था, तांत्रिक ने पहले कपड़े उतारकर पूरे शरीर पर नींबू रगड़ा और फिर...

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआसागर क्षेत्र में अंधविश्वास की काली सायबान में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है. गले के दर्द की शिकायत लेकर आई 12 वर्षीय बच्ची को ठीक करने के बहाने मध्य प्रदेश के निवाड़ी निवासी एक कथित तांत्रिक ने उसके साथ लगभग आधे घंटे तक बंद कमरे में अमानवीय और घृणित हरकतें कीं. पीड़ित परिवार के अनुसार, उनकी आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी कई दिनों से गले में तकलीफ और भोजन निगलने में परेशानी महसूस कर रही थी. डॉक्टरी इलाज से आराम न मिलने पर परिजनों ने गांव में चर्चित तांत्रिक हरभजन को 18 नवंबर को घर बुला लिया.

तांत्रिक ने बच्ची को देखते ही कहा कि उस पर “ऊपरी बाधा” है और इलाज केवल एकांत में ही संभव है. उसने साफ निर्देश दिया कि बच्ची को कमरे में ले जाने के बाद कोई भी अंदर न आए, चाहे वह कितना भी रोए-चिल्लाए. अंधविश्वास में डूबे माता-पिता ने उसकी हर बात मान ली. कमरे का दरवाजा बंद होते ही तांत्रिक ने बच्ची के कपड़े उतारवाए, नींबू उसके शरीर पर रगड़ते हुए लगातार अभद्र व्यवहार करता रहा.

मासूम की चीखें-रोने की आवाज़ बाहर तक आ रही थी, लेकिन तांत्रिक ने हर बार चेतावनी दी कि “पूजा खंडित हो जाएगी”. पूरे तीस-पैंतीस मिनट बाद जब वह बाहर निकला तो मुस्कुराते हुए बोला, “अब बच्ची पूरी तरह ठीक हो जाएगी.” बाहर आते ही बच्ची फफक-फफक कर मां से लिपट गई और रोते-रोते सारी आपबीती सुना दी. यह सुनते ही परिजनों के होश उड़ गए. जब तक वे कुछ समझ पाते, तांत्रिक मौके से फरार हो चुका था.

मामला सामने आने पर बच्ची की मां ने तुरंत बरुआसागर थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी. थाना प्रभारी राहुल राठौर ने बताया कि आरोपी हरभजन के विरुद्ध बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं और बहुत जल्द उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने का दावा किया जा रहा है.

यह घटना एक बार फिर अंधविश्वास की भयावह कीमत सामने ला रही है. ग्रामीण इलाकों में अभी भी लोग छोटी-छोटी बीमारियों के लिए ओझा-तांत्रिकों के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिसका फायदा ऐसे हैवान उठाते हैं. पुलिस और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की बीमारी में पहले डॉक्टर के पास जाएं और बच्चों को कभी भी अजनबी के साथ अकेला न छोड़ें.

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