UAE से पाकिस्तानियों की डिपोर्टेशन पर बड़ा खुलासा, ईरान को फंडिंग के आरोप से मचा हड़कंप

Global Bharat 27 May 2026 06:06: PM 1 Mins
UAE से पाकिस्तानियों की डिपोर्टेशन पर बड़ा खुलासा, ईरान को फंडिंग के आरोप से मचा हड़कंप

क्या पाकिस्तान के मुसलमान दोहरी रणनीति पर चल रहे हैं? एक तरफ पाकिस्तान की सत्ता पर बैठे लोग अमेरिका के करीब दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ यूएई में रहने वाले कुछ पाकिस्तानी शिया मुस्लिमों पर ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इसी मामले को लेकर यूएई में बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें हजारों पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किए जाने की खबर सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष निगरानी अभियान शुरू किया। इस दौरान पाकिस्तान के कुछ शिया मुस्लिमों के बैंक खातों और लेन-देन पर नजर रखी गई। जांच एजेंसियों को शक हुआ कि यूएई में रहकर कमाई करने वाले कुछ लोग ईरान को पैसे भेज रहे थे और युद्ध के दौरान आर्थिक सहायता पहुंचा रहे थे।

बताया जा रहा है कि इस खुलासे के बाद यूएई प्रशासन सतर्क हो गया, क्योंकि ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ने से वहां की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दुबई और अबू धाबी के बाजारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, पर्यटन प्रभावित हुआ और सुरक्षा चिंताओं के चलते निवेशकों में डर का माहौल बना।

इसी बीच यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। खबरों के मुताबिक, करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन पर देश के संवेदनशील इलाकों की जानकारी बाहर भेजने का शक था। इसके बाद बड़ी संख्या में पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया।

दावा किया जा रहा है कि 28 फरवरी से अब तक करीब 7500 पाकिस्तानियों को यूएई से वापस भेजा गया है। इनमें बड़ी संख्या पाकिस्तान के कुर्रम जिले से जुड़े लोगों की बताई जा रही है, जहां शिया-सुन्नी तनाव पहले भी चर्चा में रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि कई लोगों को अपना सामान तक समेटने का समय नहीं मिला और उनके खातों की जांच भी की गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान के अंदर शिया-सुन्नी विभाजन और पश्चिम एशिया की राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ पाकिस्तान की सरकार अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ कट्टरपंथी समूहों और समर्थकों पर अलग एजेंडा चलाने के आरोप लग रहे हैं।

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