यूपी चुनाव 2027: क्या चुनावी मैदान में उतरेंगे अतीक अहमद के बेटे उमर? प्रयागराज की पश्चिमी सीट पर बदले सियासी समीकरण और मुस्लिम वोट बैंक का गणित

Rahul Jadaun 17 Aug 2026 02:13 PM 2 Mins
यूपी चुनाव 2027: क्या चुनावी मैदान में उतरेंगे अतीक अहमद के बेटे उमर? प्रयागराज की पश्चिमी सीट पर बदले सियासी समीकरण और मुस्लिम वोट बैंक का गणित

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। संगम नगरी प्रयागराज की राजनीति में कभी दशकों तक दबदबा रखने वाले माफिया अतीक अहमद के परिवार को लेकर सियासी गलियारों में नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। चर्चा है कि अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद उमर क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं? अतीक और उसके भाई अशरफ के खात्मे तथा बेटे असद के एनकाउंटर के बाद, जेल में बंद उमर के सियासी भविष्य, संभावित सीट और राजनीतिक दल को लेकर प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक कयासबाजी का दौर जारी है।

प्रयागराज पश्चिम सीट और अतीक का पुराना गढ़ प्रयागराज पश्चिम (पूर्व में इलाहाबाद पश्चिम) विधानसभा सीट करीब चार दशकों तक अतीक अहमद की राजनीति का केंद्र रही है। अतीक यहां से लगातार पांच बार विधायक रहा। हालांकि, 2017 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सिद्धार्थनाथ सिंह ने इस सीट पर कमल खिलाकर माफिया के इस अभेद्य किले को ढहा दिया था और 2022 में भी अपनी जीत दोहराई। अब 2027 के चुनाव में यह सीट पहली बार बिना अतीक के सीधे खौफ के लड़ी जाएगी, लेकिन अतीक के परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बड़े बेटे उमर के नाम की चर्चा जोरों पर है।

किस दल और किस सीट से हो सकती है दावेदारी? अतीक अहमद ने अपने राजनीतिक जीवन में सपा, अपना दल से लेकर आखिरी दिनों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) तक का रुख किया था। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन बसपा के टिकट पर मेयर चुनाव की तैयारी में थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमर के सामने सपा या कांग्रेस जैसी मुख्यधारा की पार्टियों से टिकट पाना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि कोई भी बड़ा दल माफिया की छवि वाले परिवार को टिकट देकर बैकफुट पर नहीं आना चाहेगा। ऐसे में उमर के पास असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM या निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने का ही विकल्प बचता है।

प्रयागराज में मुस्लिम वोटर्स और बदलता समीकरण प्रयागराज पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 4 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम, पिछड़ा (ओबीसी) और दलित मतदाताओं की तादाद निर्णायक है। अतीक के न रहने के बाद मुस्लिम वोट बैंक अब एकतरफा किसी एक परिवार के पीछे जाने के बजाय समाजवादी पार्टी और अन्य विकल्पों की ओर देख रहा है। वहीं, योगी सरकार द्वारा माफिया के अवैध कब्जों पर बुलडोजर एक्शन और गरीबों को मकान देने की नीति के चलते इलाके में 'माफिया बनाम विकास' का नैरेटिव मजबूत हुआ है। ऐसे में अगर उमर जेल से या जमानत मिलने पर चुनाव लड़ते भी हैं, तो उनके लिए 2027 की सियासी डगर आसान नहीं रहने वाली है।

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