अमेरिकी सेना के सर्वाइवर्स ने US के दावे का किया खंडन, कुवैत हमले की भयावहता बताई

Amanat Ansari 11 Apr 2026 01:00: PM 4 Mins
अमेरिकी सेना के सर्वाइवर्स ने US के दावे का किया खंडन, कुवैत हमले की भयावहता बताई

US-Iran War:  ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के महज दो दिन बाद अमेरिका को बड़ा झटका लगा. कुवैत में उनके एक बेस पर ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. यह 2021 के बाद अमेरिकी बलों पर सबसे घातक हमला था. वहां मौजूद लगभग 60 सैनिक पूरी तरह बिना सुरक्षा के थे. हमले के एक महीने बाद, सर्वाइवर्स ने अमेरिकी रक्षा सचिव पेट हेगसेथ (Pete Hegseth) द्वारा दी गई आधिकारिक कहानी को खारिज कर दिया.

उन्होंने CBS न्यूज को बताया कि वे पूरी तरह असुरक्षित और अनपेक्षित थे. ईरान द्वारा कुवैत के शुऐबा बंदरगाह (Port of Shuaiba) पर किए गए हमले में 6 सैनिकों की मौत के अलावा 20 अन्य घायल हो गए थे. इस घटना के बारे में ज्यादातर जानकारी अभी भी गोपनीय रखी गई है.

कुछ दिन बाद रक्षा सचिव पेट हेगसेथ ने कहा था कि एक स्क्विर्टर ड्रोन कुवैत के मजबूत किलेबंद बेस की सुरक्षा को चकमा देकर अंदर घुस आया और भारी नुकसान पहुंचाया. लेकिन सेना के सर्वाइवर्स ने इसे पुराना सैन्य बेस बताया, जिसमें हवाई हमलों से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी. एक घायल सैनिक ने CBS न्यूज़ को बताया, ''एक ड्रोन घुस आया यह तस्वीर बनाना पूरी तरह झूठ है. हमारी यूनिट खुद को बचाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. यह कोई किलेबंद जगह नहीं थी.''

खतरे में होने के बावजूद सैनिकों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और और ज्यादा जान-माल के नुकसान को रोकने की कोशिश की. एक सैनिक ने कहा, ''उन सैनिकों ने खुद को खतरे में डाल दिया... मैं उन पर बेहद गर्व करता हूं.''

कुवैत बेस एक जाना-माना टारगेट था

उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन क्या हुआ? स्थिति कैसे बिगड़ी? आइए ‘60 बहादुरों’ की कहानी समझते हैं. ये सैनिक 103rd Sustainment Command का हिस्सा थे. अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने से एक हफ्ता पहले ट्रंप प्रशासन ने कुवैत में तैनात ज्यादातर सैनिकों को जॉर्डन और सऊदी अरब के बेस पर शिफ्ट कर दिया था. ये बेस ईरानी मिसाइलों की रेंज से काफी दूर थे.

सैनिकों को बताया गया था कि वे 30 दिनों में वापस आ जाएंगे और उन्हें अपना ज्यादातर सामान वहीं छोड़ने को कहा गया. इससे साफ पता चलता था कि अमेरिका को भरोसा था कि वह 3-4 हफ्तों में ईरान को पूरी तरह कुचल देगा. लेकिन ईरान ज्यादा लचीला निकला. युद्ध 40 दिनों तक चला और उसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ.

जब ज्यादातर सैनिकों को ईरान से दूर सुरक्षित बेस पर भेज दिया गया, तब 103rd Sustainment Command के करीब 60 जवान कुवैत के शुऐबा बंदरगाह के एक छोटे सैन्य आउटपोस्ट पर भेज दिए गए. उनका काम मध्य पूर्व में हथियार, उपकरण और सैनिकों की आवाजाही का प्रबंधन करना था.

एक सैनिक ने CBS न्यूज़ को बताया, ''हम ईरान के और करीब चले गए, एक ऐसे असुरक्षित इलाके में जो पहले से ही जाना-माना टारगेट था... मुझे नहीं लगता कि कभी कोई ठोस वजह बताई गई.''

पुराना बेस, कोई हवाई सुरक्षा नहीं

ताकतिक संचालन केंद्र (Tactical Operations Centre) ड्रोन युद्ध से बहुत पहले का बना हुआ था. बेस पर बुनियादी सुरक्षा थी. स्टील-रिइन्फोर्स्ड कंक्रीट बैरियर, जो रॉकेट या मोर्टार से बचाने के लिए थे, लेकिन ऊपर से होने वाले हमलों से कोई सुरक्षा नहीं थी.
एक सैनिक ने याद करते हुए कहा, ''यह एक क्लासिक, पुराना सैन्य बेस था... बंकर के लिहाज से जितना कमजोर हो सकता है, उतना ही था. कुछ छोटे-छोटे बैरियर... और कई छोटी-छोटी टिन की इमारतें, जिनमें अस्थायी दफ्तर बना दिए गए थे.''

एक अन्य सैनिक ने कहा कि अमेरिका को खुफिया जानकारी थी कि यह बेस ईरान की संभावित टारगेट लिस्ट में शामिल है. 2 मार्च को सायरन बजने लगे. आने वाली मिसाइलों का अलर्ट था. सैनिक एक सीमेंट बंकर में चले गए. एक बैलिस्टिक मिसाइल उनके ऊपर से गुजरी. कुछ मिनट बाद ऑल-क्लियर का अलर्ट बजा और सैनिक राहत की सास लेते हुए अपने ऑफिस लौट आए.

लेकिन 30 मिनट बाद अचानक ज़मीन हिल गई. चारों तरफ धूल का गुबार था. एक सैनिक ने बताया, ''यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा फिल्मों में देखते हैं. कान बज रहे थे. सब कुछ धुंधला लग रहा था. नजर कमज़ोर हो गई थी. चक्कर आ रहे थे.'' यह ईरान का एक शाहिद (Shahed) ड्रोन था, जो ठीक बेस के बीचों-बीच फट गया.  हमले के बाद का मंजर बेहद भयावह था. एक सैनिक ने कहा, ''खून हर तरफ था... सिर पर चोटें, भारी खून बहना, कई लोगों के कान फट गए थे... हाथों से, पैरों से और पेट से खून निकल रहा था.''

इस ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए. हमले के कई घंटे बाद भी बेस से काला धुआं उठता दिखा. इमारतों की दीवारें काली पड़ गई थीं और ब्लास्ट की वजह से बाहर की तरफ उड़ गई थीं. कुछ हिस्से इमारत से अलग हो रहे थे. एक सैनिक ने बेस की सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा, ''मैं इसे जीरो कैटेगरी में रखूंगा.''

दूसरे सैनिक ने कहा कि अभी भी बेस के अंदर कई शवों की पहचान नहीं हो पाई है और उन्हें निकाला नहीं गया है. CBS न्यूज़ से बात करने वाले सभी सर्वाइवर्स एक बात पर एकमत थे कि यह हमला रोका जा सकता था. हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कहा कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया गया था.

अमेरिकी रक्षा सहायक सचिव शॉन पार्नेल (Sean Parnell) ने CBS न्यूज़ के जवाब में ट्वीट किया, ''सुरक्षित सुविधा 6 फुट ऊंची दीवारों से मजबूत की गई थी. हम फिलहाल पूरे मध्य पूर्व में दुनिया का सबसे व्यापक एयर डिफेंस छाता बिछाए हुए हैं.''

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