तेहरान: एक तरफ इस्लामाबाद में शांतिवार्ता हो रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप कह रहे हैं, हमने पहले से भी बड़े हथियारों से विमानों को लैस कर दिया है, तो सवाल उठ रहा है क्या ट्रंप फिर से युद्ध चाहते हैं, इसकी कहानी अगले 3 मिनट में आपको समझाते हैं. ये हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जिनके साथ अमेरिका ने अपने सीक्रेट सर्विस कमांडो भी भेजे हैं, और इस्लामाबाद में जहां बैठक हो रही है, उसके बाहर भी अमेरिकी कमांडो तैनात हैं, जबकि पाकिस्तान ने खुद 10 हजार सैनिक और अपने यहां के सबसे एडवांस ब्लू बुक प्रोटोकॉल को लागू किया है.
जो ये बताता है पाकिस्तान की सुरक्षा पर अमेरिका को जरा भी यकीन नहीं है. तो सवाल उठता है फिर ये बैठक इस्लामाबाद में क्यों हो रही है, क्या मुनीर और शहबाज मिलकर अमेरिका की तरफदारी कर रहे हैं. क्या इन्हें ट्रंप ने कोई सीक्रेट मिशन दिया है, जिस पर वहां बात बननी है...जानकार कहते हैं कि अगर ईरान क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन में होर्मुज का टोल टैक्स लेने को तैयार हो जाता है, तो फिर ये जंग रुक सकती है. लेकिन अब तक वो इसे ईरानी मुद्रा या डॉलर में लेना चाहता था. ताकि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हो.
क्योंकि क्रिप्टो करेंसी रुपये-पैसे की तरह छूने वाली करेंसी नहीं, बल्कि डिजिटल करेंसी है, और इसमें ईरान अगर पेमेंट लेता है तो इससे सीधा फायदा अमेरिका को होगा, और ट्रंप यही चाहते हैं कि युद्ध की नुकसान की भरपाई वो किसी न किसी तरीके से ईरान से करवाएं. अब ट्रंप इस शर्त के पीछे इतना क्यों पड़े हैं, इसे समझने के लिए ये रिपोर्ट देखिए.
ये फोर्ब्स मैगजीन की रिपोर्ट है, जो लिखता है बिटक्वाइन की कीमत जब 1 लाख 8 हजार डॉलर थी, तब डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने दावा किया था कि ये 1 लाख 80 हजार तक जाएगा, छोटे बेटे जूनियर ट्रंप ने भी यही दावा दोहराया था. उसके बाद जुलाई 2025 में क्रिप्टो करेंसी के समर्थन में ट्रंप एक कानून लाते हैं, और बिटक्वाइन में उछाल आ जाता है, आज ट्रंप के परिवार का खुद का क्रिप्टो फर्म भी है, जिसमें इन सबकी हिस्सेदारी करीब 5 अरब डॉलर है.
यानि ट्रंप का परिवार बिटक्वाइन से मालामाल हो रहा है, इनके दामाद जेरेड कुशनर जो व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार हैं, वो भी इस्लामाबाद की बैठक में पहुंच रहे हैं, जबकि वो एक बिजनेसमैन हैं, उनके पास कोई कूटनीतिक अनुभव नहीं है, पर वो जो कहेंगे, वही डील फाइनल होगी. और वो बिटक्वाइन के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं, CNBC अपनी रिपोर्ट में ये तक दावा करता है कि साल 2019 में जेरेड कुशनर ने ही ट्रंप को क्रिप्टो करेंसी को लेकर नियम बनाने का सुझाव दिया था, पर उस वक्त ट्रंप इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन जैसे ही कमाई बढ़ी, ट्रंप परिवार ने अरबो डॉलर कमाए, इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलवाने की होड़ में ट्रंप जुट गए. और ये लड़ाई भी उसी की है...
चूंकि ट्रंप ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि डॉलर का दौर जल्द ही खत्म होने वाला है, भारत-चीन और रूस मिलकर डॉलर की जगह अपनी-अपनी करेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ट्रंप टैरिफ लगाकर इन अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, यानि जो सामने दिख रहा है कहानी वो नहीं है, बल्कि कहानी पर्दे के पीछे छिपी है, जिसमें डॉलर को मजबूत करने या दुनिया को डिजिटल करेंसी की तरफ ले जाने की दिशा में अमेरिका आगे बढ़ रहा है.
भारत-चीन और रूस उसकी नहीं सुनने वाले, इसीलिए वो पाकिस्तान के सहारे पहले ईरान पर दबाव बनाना चाहता है, फिर पाकिस्तान समेत एशिया के कई मुल्कों में क्रिप्टो करेंसी को मजबूत करना चाहता है, इसके लिए बकायदा वो क्रिप्टो करेंसी सोने-चांदी में भी लगा रहा है, जिससे इसके दाम बढ़े, पर ट्रंप का ये प्लान क्या आगे बढ़ पाएगा, या फिर अगले चुनाव में अगर कुर्सी गई तो कहानी वहीं खत्म हो जाएगी, क्योंकि अमेरिकी की दादागिरी के दिन लदने वाले हैं, ऐसा अनुमान अब तक कई एक्सपर्ट लगा चुके हैं...