Uttrakhand High court : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे 62 वर्षीय प्रभात ध्यानी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति के प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के आधार पर उसे हिरासत में लेना कानून के शासन के अनुरूप नहीं है.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से तीखे सवाल पूछे. अदालत ने कहा कि क्या आप सरकार की छवि बचाने के लिए यहां हैं या लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना किसी वैध कानूनी आधार के किसी नागरिक को रोकना या हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
जानकारी के अनुसार, 62 वर्षीय प्रभात ध्यानी एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई को चुनौती दिए जाने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हिस्सा है. यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस कानूनी आधार या सार्वजनिक व्यवस्था को तत्काल खतरे के प्रमाण नहीं हैं, तो केवल प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना के आधार पर उसे हिरासत में नहीं लिया जा सकता.
अदालत की इस टिप्पणी को नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फिलहाल मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में जारी है और पुलिस की कार्रवाई पर अदालत की निगरानी बनी हुई है. हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद इस मामले ने संवैधानिक अधिकारों और पुलिस की शक्तियों के संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है.