नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की अटकलों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है और विपक्ष के "नजरबंद" होने के दावों को खारिज किया. मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि धनखड़ साहब का इस्तीफा पत्र स्पष्ट है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने अपने अच्छे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों व सरकारी सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है.
विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा धनखड़ के "नजरबंद" होने के दावों पर शाह ने कहा कि सत्य और झूठ का फैसला सिर्फ विपक्ष के बयानों पर नहीं करना चाहिए. उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर हंगामा न करने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि धनखड़ ने संवैधानिक पद संभाला था और संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने निजी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया. इस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा नहीं करनी चाहिए.
विपक्षी नेताओं ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए, दावा किया कि सरकार ने उन्हें "खामोश" कर दिया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह देश के इतिहास में पहली बार है जब उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ उनकी आवाज दबाने की बात सामने आई. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की और धनखड़ के ठिकाने पर सवाल उठाए.
उन्होंने बीजेपी पर देश को "मध्यकाल" में ले जाने का आरोप लगाया. राहुल ने 20 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम मध्यकाल में जा रहे हैं, जहां राजा अपनी मर्जी से किसी को हटा सकता था. लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए व्यक्ति को सरकार नापसंद करे तो ईडी के जरिए केस लगाकर 30 दिन में हटा देती है. यह भी न भूलें कि हम नया उपराष्ट्रपति क्यों चुन रहे हैं. कल मैं किसी से बात कर रहा था और मैंने कहा कि पुराना उपराष्ट्रपति कहां गया? वह चला गया.
सुप्रीम कोर्ट के वकील और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी सवाल उठाया कि धनखड़ की सार्वजनिक अनुपस्थिति को देखते हुए क्या हेबियस कॉर्पस याचिका दायर करनी चाहिए. हालांकि, बीजेपी ने कहा कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया और उनके साथ किसी तरह के मतभेद की बात को खारिज किया.
जगदीप धनखड़ ने संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन 21 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह "स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं और चिकित्सीय सलाह का पालन करना चाहते हैं." उस समय वह राज्यसभा के सभापति थे और उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा था.
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