वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गया है, भले ही तेहरान के साथ चर्चाएं अभी भी जारी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकियों को संबोधित करते हुए यह बात कही. ट्रंप का यह संबोधन अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी अभियान शुरू किए हुए सिर्फ एक महीने से थोड़ा अधिक समय बाद आया है. इसमें उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के युद्ध को लेकर अपनी पिछली अधिकांश बातों को दोहराया, लेकिन आगे क्या होने वाला है, इसकी कोई ठोस तस्वीर नहीं दी.
अपने संबोधन में ट्रंप ने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई में और बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को पाषाण युग में ले जाएगा, साथ ही कूटनीति के लिए जगह भी छोड़ी और कहा कि उनके स्टाफ अज्ञात ईरानी अधिकारियों से संपर्क में है.ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत से ही हमने कहा था कि हम तब तक जारी रखेंगे जब तक हमारे उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो जाते. हमने जो प्रगति की है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि हम अमेरिका के सभी सैन्य उद्देश्यों को बहुत जल्द पूरा करने की राह पर हैं.
उन्होंने आगे कहा कि हम काम पूरा करेंगे और इसे बहुत तेजी से पूरा करेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के चार प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख किया, ईरान की आक्रामक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसकी मिसाइल उत्पादन प्रणालियों को तोड़ना, उसकी नौसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को निष्क्रिय करना तथा यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके.
''ईरान को पाषाण युग में ले जाएंगे''
राष्ट्र को दिए गए अपने टेलीविजन संबोधन में ट्रंप ने चेतावनी दी कि वाशिंगटन अगले दो-तीन हफ्तों में ईरान पर अत्यंत कठोर हमला करेगा और देश को पाषाण युग में ले जाएगा. उन्होंने कहा कि हम अगले दो-तीन हफ्तों में उन्हें बेहद जोरदार हमला करेंगे. हम उन्हें पाषाण युग में ले जाएंगे, जहां उन्हें होना चाहिए.
''नौसेना खत्म, वायुसेना खंडहर में''
इसके अलावा, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि उसकी नौसेना “खत्म” हो गई है और उसकी वायुसेना खंडहरों में पड़ी हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अधिकांश नेतृत्व को समाप्त कर दिया गया है. ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना चली गई, उनकी वायुसेना खंडहर में है, उनके ज्यादातर नेता अब मर चुके हैं. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कमांड और कंट्रोल अभी ध्वस्त किया जा रहा है, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता नाटकीय रूप से कम हो गई है और उनके हथियार, कारखाने तथा रॉकेट लॉन्चर टुकड़े-टुकड़े किए जा रहे हैं.
पिछले अमेरिकी युद्धों से तुलना
पिछले अमेरिकी सैन्य अभियानों से तुलना करते हुए ट्रंप ने कहा कि जबकि पिछले युद्ध सालों या दशकों तक चले, वर्तमान ईरान अभियान सिर्फ एक महीने से थोड़ा अधिक समय से चल रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका की विश्व युद्ध-1 में भागीदारी एक साल, सात महीने और पांच दिन तक चली. विश्व युद्ध-2 तीन साल, आठ महीने और 25 दिन तक चला. कोरियाई युद्ध तीन साल, एक महीना और दो दिन तक चला. वियतनाम युद्ध 19 साल, पांच महीने और 29 दिन तक चला. इराक युद्ध आठ साल, आठ महीने और 28 दिन तक चला. हम इस सैन्य अभियान में सिर्फ 32 दिन से हैं. और देश पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो चुका है तथा वास्तव में अब कोई खतरा नहीं रहा.
''हमें ईरान का तेल नहीं चाहिए''
ट्रंप ने यह भी जोर देकर कहा कि ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई देश के विशाल संसाधनों, जिसमें तेल भी शामिल है, को हासिल करने के लिए नहीं है, बल्कि अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए है. उन्होंने कहा कि हम अब मध्य पूर्व से पूरी तरह स्वतंत्र हैं, फिर भी हम वहां मदद के लिए हैं. हमें वहां रहने की जरूरत नहीं है. हमें उनका तेल नहीं चाहिए. हमें उनकी कोई चीज नहीं चाहिए. हम वहां अपने सहयोगियों की मदद के लिए हैं.
ट्रंप ने हार्मुज की नाकेबंदी से बढ़ी ईंधन की कीमतों को लेकर चिंताओं को भी शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अपने खुद के पर्याप्त तेल और गैस भंडार हैं. अपनी ड्रिल बेबी, ड्रिल नीति पर जोर देते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब सऊदी अरब और रूस के संयुक्त उत्पादन से भी अधिक तेल और गैस का उत्पादन करता है.
''सहयोगियों को नुकसान नहीं होने देंगे''
ट्रंप ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगियों, जिनमें इजरायल और खाड़ी देश शामिल हैं, का धन्यवाद किया और ईरान या अन्य देशों से किसी भी खतरे के खिलाफ उनकी रक्षा करने का संकल्प दोहराया. उन्होंने कहा कि मैं मध्य पूर्व में हमारे सहयोगियों इजरायल, कतर, कुवैत, यूएई का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. वे शानदार रहे हैं और हम उन्हें किसी भी रूप, आकार या रूप में नुकसान नहीं होने देंगे या असफल नहीं होने देंगे. आज का यह भाषण अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ट्रंप का मध्य पूर्व संकट पर पहला प्राइम-टाइम संबोधन था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई थी.