अमेरिका के 25% टैरिफ का क्या हुआ? ट्रंप-पुतिन की बैठक का भारत के लिए क्या है मायने कमेंट में पढ़ें खबर

Amanat Ansari 16 Aug 2025 05:59: PM 2 Mins
अमेरिका के 25% टैरिफ का क्या हुआ? ट्रंप-पुतिन की बैठक का भारत के लिए क्या है मायने कमेंट में पढ़ें खबर

नई दिल्ली: शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के बीच की मीटिंग बनतीजा संपन्न हुई, जिसके बाद ट्रंप ने मीडिया कर्मियों से भी बातचीत करने से इनकार कर दिया. ट्रंप के हाव-भाव को देखकर स्पष्ट रूप से बताया जा सकता है कि वह कितने दबाव में है. हालांकि, उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध पर कारगर बातचीत की उम्मीद जताई है, जो जंग अभी तक समाप्त नहीं हुआ है.

इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा भारत पर अमेरिकी टैरिफ की थी. ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी हुई थी कि पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप टैरिफ को लेकर क्या निर्णय लेते हैं. क्योंकि ट्रंप पुतिन की मुलाकात से पहले अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा था कि अगर बैठक बेनतीजा रहती है तो ट्रैरिफ को और बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने यूरोपीय देशों से भी अपील की थी कि जो देश रूस से व्यापार करते हैं, उनके खिलाफ अमेरिका का साथ दें.

वहीं भारत स्पष्ट रूप से कह चुका है कि तेल को लेकर उसे निशाना बनाया जाना गलत हैं, क्योंकि भारत अन्य देशों की तरह न सिर्फ अपना हित देख रहा है, बल्कि तेल को लेकर वैश्विक बाजार मूल्य को भी स्थिर रख रहा है. ट्रंप ने पुतिन के साथ बातचीत से पहले भारत पर टैरिफ को लेकर कुछ संकेत जरूर दिए थे, जिसकी अभी चर्चा हो रही है. भारत को उम्मीद थी कि ट्रंप पुतिन के बीच सार्थक वार्ता होने पर 25 प्रतिशत एडिशनल टैरिफ से राहत मिल सकती है.

बैठक से पहले ट्रंप एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में इंडिया का जिक्र किया था. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस ने एक तेल खरीदने वाले ग्राहक को खो दिया है. ट्रंप का इशारा भारत की ओर था, क्योंकि भारत के अलावा जो देश रूस से ज्यादा तेल खरीदता है, वह चीन है. और चीन को ट्रंप ने पहले से ही राहत दे दी है. अमेरिका चीन से अभी केवल 30 फीसदी टैरिफ ही वसूल रहा है.

भारत को अभी भी उम्मीद है कि ट्रंप ने जो 25 फीसीदी एडिशनल टैरिफ लगाया है, उसे या तो वह वापस ले ले या फिर इसे लागू करने की 27 अगस्त की डेडलाइन को टाल दें. बता दें कि भारत ने ट्रंप-पुतिन मुलाकात का स्वागत किया है. विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत अलास्का में राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन के बीच हुई मीटिंग का स्वागत करता है. शांति की दिशा में उनका नेतृत्व सराहनीय है. भारत की ओर से आगे कहा गया है कि कोई भी रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है. दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत देखना चाहती है.

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