26 साल बाद फिर CRPF जवान बने गिरवर दास महाराज: संत बने, कानूनी लड़ाई लड़ी और वर्दी वापस पाई

Amanat Ansari 02 Sep 2026 05:32 PM 1 Mins
26 साल बाद फिर CRPF जवान बने गिरवर दास महाराज: संत बने, कानूनी लड़ाई लड़ी और वर्दी वापस पाई

मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के छिछावली गांव निवासी गिरवर सिंह तोमर की कहानी जुनून, धैर्य और संघर्ष की मिसाल है. 26 साल पहले CRPF से बर्खास्त हुए गिरवर सिंह ने नौकरी छूटने के बाद संत का जीवन अपना लिया था. अब लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें दोबारा CRPF में सेवा का मौका मिला है. वे गिरवर दास महाराज के नाम से जाने जाते हैं.

गिरवर सिंह को किशोरावस्था से ही सेना में जाने का जुनून था. 1991 में उनका चयन CRPF में हुआ. करीब आठ साल सेवा करने के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद हो गया. विभागीय कार्रवाई के बाद 21 अक्टूबर 1999 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

संत बने और नाम पड़ा गिरवरदास महाराज

नौकरी जाने के बाद वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे. कुछ समय परिवार के साथ रहने के बाद गांव से करीब एक किलोमीटर दूर बारहद्वारी मंदिर में रहने लगे. चार-पांच साल वहां बिताने के बाद मुरैना के गुफा मंदिर पहुंचे. मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें ‘गिरवरदास महाराज’ नाम दिया. पूजा-पाठ और मंदिर सेवा में जीवन बिताते हुए भी उन्होंने बर्खास्तगी के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी.

26 साल की कानूनी जंग

1999 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन CRPF की ओर से स्टे लिए जाने के बाद मामला लंबा खिंच गया. उन्होंने डबल बेंच में अपील की और वर्षों तक संघर्ष जारी रखा. 28 अगस्त 2025 को कोर्ट ने CRPF को तीन महीने के भीतर दोबारा ज्वाइनिंग देने का आदेश दिया. तय समय में ज्वाइनिंग नहीं मिलने पर उन्होंने फिर कानूनी रास्ता अपनाया.

आखिरकार 26 अगस्त 2026 को CRPF ने उन्हें दोबारा सेवा में लेने का आदेश जारी कर दिया. उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दी गई है. गिरवर सिंह की यह कहानी सिर्फ नौकरी में वापसी की नहीं, बल्कि उस अटूट जुनून की है जिसमें 26 साल इंतजार के बाद न्याय और देश सेवा का मौका मिला.

Madhya Pradesh Morena Girvar Singh Tomar CRPF Girvar Singh Girvar Das Maharaj

Recent News