Who is Yesubai Bhonsale: मशहूर ऐतिहासिक शख्सियत छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में बहुत कुछ लिखा और बताया जाता रहा है, लेकिन उनके बेटे छत्रपति संभाजी महाराज और उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. विक्की कौशल और रश्मिका मंदाना अभिनीत नई फिल्म 'छावा' ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है. इस रिपोर्ट के माध्यम से जानेंगे संभाजी महाराज और उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले ने शिवाजी महाराज की लिगेसी को आगे बढ़ान के लिए क्या-क्या किया और कैसे दोनों ने मिलकर एक नहीं बल्कि कई बार औरंगजेब के दांत खट्टे कर दिए.
ऐतिहासिक रिपोर्ट्स से पता चलता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 8 शादियां की थीं और उनमें से ज्यादातर शादियां राजनीतिक कारणों से की थीं. इन आठ शादियों से शिवाजी को 6 बेटियां और दो बेटे हुए. उनके सबसे बड़े बेटे संभाजी का जन्म उनकी पहली पत्नी साईबाई से हुआ था, जबकि उनके सबसे छोटे बेटे राजाराम का जन्म उनकी पत्नी सोयराबाई से हुआ था. शिवाजी के बेटों की उम्र में 13 साल का अंतर था.
14 मई, 1657 को जन्मे संभाजी राजे ने बहुत कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया और उनका पालन-पोषण उनकी दादी और शिवाजी की मां जीजाबाई ने किया. चाहे वह उनकी विद्वत्तापूर्ण शिक्षा हो या एक सैनिक के रूप में प्रशिक्षण, संभाजी काफी प्रतिभाशाली थे और इसलिए उन्हें लोकप्रिय रूप से छावा भी कहा जाता था. छावा एक हिंदी शब्द जिसका अर्थ है शेर का बच्चा होता है.
1664 में, छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी की शादी जीवूबाई उर्फ येसुबाई के साथ तय हुई, जो देशमुख परिवार से थीं. संभाजी और येसुबाई का विवाह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधन था. महाराष्ट्र के ताल-कोंकणी क्षेत्र में देशमुख काफी शक्तिशाली थे, जिसने शिवाजी और संभाजी को मराठा शासन का विस्तार करने में मदद की थी.
जीवुबाई उर्फ येसुबाई का जन्म राजौ शिर्के के रूप में हुआ था 1664 में, उनका विवाह शिवाजी के सबसे बड़े बेटे संभाजी महाराज से हुआ और जल्द ही उन्हें महारानी येसुबाई भोंसले के नाम से जाना जाने लगा. हालांकि, वह सिर्फ संभाजी की पत्नी ही नहीं थीं, बल्कि एक राजनीतिक नेता भी थीं, जिन्होंने मराठा साम्राज्य की रक्षा करने में मदद की. खासकर मुश्किल समय में उन्होंने सांभाजी का भरपूर साथ दिया.
1689 में, जब उनके पति संभाजी को मुगल सम्राट औरंगजेब ने मार डाला, तो येसुबाई ने ऐसे कठिन समय में बहादूरी के साथ कूटनीति और साहस का परिचय दिया. 1680 से 1730 तक येसुबाई भोंसले मराठा साम्राज्य का एक मजबूत स्तंभ बन गईं. यहां तक कि जब उन्हें औरंगजेब ने लगभग 30 साल तक कैद में रखा, तब भी वह मजबूत रहीं और यह सुनिश्चित किया कि मराठा साम्राज्य कायम रहे.