पटना: बिहार की सियासत में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासन के बाद नई राजनीतिक पार्टी के गठन की अटकलों के बीच तेज प्रताप ने शुक्रवार शाम 5 बजे पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. लेकिन, वह निर्धारित समय पर पत्रकारों के सामने नहीं आए और दो घंटे तक इंतजार कराने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दी गई. इस घटना ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, और सूत्रों का दावा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले उनकी मां राबड़ी देवी ने फोन कर उन्हें नई पार्टी का ऐलान टालने के लिए मना लिया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार और निराशा
तेज प्रताप ने अपने सरकारी आवास पर शुक्रवार शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय दिया था, जिसे लेकर यह कयास लग रहे थे कि वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे. पत्रकार, समर्थक और स्थानीय नेता उनके आवास पर जमा हो गए, लेकिन तेज प्रताप न तो समय पर पहुंचे और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया. दो घंटे तक इंतजार करने के बाद उनके एक करीबी सहयोगी ने पत्रकारों को सूचित किया कि "तकनीकी कारणों" से प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दी गई है. इस घटना ने पत्रकारों में नाराजगी पैदा कर दी है.
पूर्व सीएम राबड़ी देवी की भूमिका?
सूत्रों के अनुसार, तेज प्रताप की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले उनकी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उन्हें फोन किया. राबड़ी ने कथित तौर पर तेज प्रताप को समझाया कि विधानसभा चुनाव से पहले नई पार्टी बनाना RJD और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को कमजोर कर सकता है. तेज प्रताप, जो RJD और परिवार से निष्कासित होने के बाद केवल अपनी मां से ही नियमित संपर्क में हैं, ने उनकी सलाह मान ली और प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द कर दी. एक करीबी सूत्र ने बताया कि राबड़ी जी नहीं चाहतीं कि परिवार में और बिखराव हो. उन्होंने तेज प्रताप को समझाया कि यह समय एकजुट रहने का है. बता दें कि तेज प्रताप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी मां नियमित रूप से उनका हालचाल लेती हैं और हाल ही में उन्हें अपने गांव से आम भेजे थे. यह रिश्ता इस बात का संकेत है कि राबड़ी देवी परिवार में सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं.
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RJD से निष्कासन और बागी तेवर
तेज प्रताप को मई 2025 में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने "पार्टी विरोधी गतिविधियों" और "पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ व्यवहार" के लिए छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था. यह कार्रवाई तब हुई थी, जब तेज प्रताप ने एक फेसबुक पोस्ट में अनुष्का यादव के साथ अपने 12 साल के रिश्ते का खुलासा किया था, जिसे बाद में उन्होंने हैकिंग का दावा बताकर खारिज कर दिया था. इसके बाद से तेज प्रताप ने बागी रुख अपनाया और अपने समर्थकों के साथ वैशाली, समस्तीपुर और हाजीपुर में कई जनसभाएं कीं.
9 जुलाई को वैशाली के महुआ में उन्होंने RJD का झंडा अपनी गाड़ी से हटाकर एक नया हरा और सफेद झंडा लगाया, जिसमें "टीम तेज प्रताप यादव" लिखा था. इस जनसभा में उन्होंने अपने समर्थकों को एकजुट करने का आह्वान किया और कहा, "मैं बिहार के लिए कुछ नया करने जा रहा हूं." इस कदम ने नई पार्टी के गठन की अटकलों को हवा दी थी. सूत्रों का कहना है कि तेज प्रताप महुआ सीट से 2025 के विधानसभा चुनाव में उतरने की योजना बना रहे हैं, जो उनके एक करीबी सहयोगी की मौजूदा सीट है.
परिवार में तनाव और तेजस्वी की चुप्पी
उधर तेज प्रताप का निष्कासन और उनकी हाल की गतिविधियां लालू-राबड़ी परिवार में तनाव को उजागर करती हैं. तेजस्वी यादव, जो RJD के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, ने अपने भाई की हरकतों पर ज्यादा टिप्पणी करने से परहेज किया है. हालांकि, उन्होंने पहले कहा था, "हर व्यक्ति को अपने फैसले लेने का हक है, लेकिन पार्टी और परिवार की गरिमा सर्वोपरि है." तेजस्वी की चुप्पी और राबड़ी की मध्यस्थता इस बात का संकेत है कि परिवार तेज प्रताप को मनाने की कोशिश में है, ताकि चुनाव से पहले RJD का वोट बैंक प्रभावित न हो.
तेज प्रताप की अलग हो चुकी पत्नी ऐश्वर्या राय ने भी इस पूरे प्रकरण को "सियासी ड्रामा" करार दिया है. उन्होंने कहा, "तेज प्रताप की हरकतें केवल सुर्खियां बटोरने के लिए हैं. परिवार को उनके रिश्ते की जानकारी पहले से थी."