नई दिल्ली: साल था 2022 का, हरियाणा में निकाय चुनाव हो रहे थे, पानीपत की बुवाना लाखू गांव में सरपंच पद के लिए 7 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. पर दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला कांटे की टक्कर का था. इसमें पहले थे कुलदीप सिंह, जबकि दूसरे थे मोहित कुमार. चुनावी नतीजे घोषित हुए तो कुलदीप को विजेता घोषित किया गया, लेकिन मोहित कुमार ने गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाकर अपील दायर कर दी.
उसी साल नवंबर महीने में गलती पकड़ी गई और 51 वोटों से मोहित को विजेता घोषित कर दिया गया. लेकिन सरपंच की कुर्सी मोहित को फिर भी नहीं मिली. क्योंकि मौजूदा सरपंच ने हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया. अब यहां से दूसरी कहानी शुरू होती है. पानीपत ट्रिब्यूनल में मोहित अपील दायर करते हैं, जहां से राहत नहीं मिलती तो सीधा साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं और कहते हैं जज साहब मेरे यहां वोटों की गलत गिनती हुई है, मुझे इंसाफ चाहिए.
जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एनके सिंह की बेंच पूरे मामले को सुनने के बाद पानीपत के डिप्टी कमिश्नर-कम-चुनाव अधिकारी को दो दिनों के भीतर मोहित को विजेता घोषित करने का आदेश देती है. साथ ही कहती है इन्हें तुरंत पदभार ग्रहण करवाइए.
अब यहां समझने वाली बात ये है कि ऐसी गलती हुई कैसे? क्या चंडीगढ़ में चुनाव अधिकारी का खेल पकड़ा गया, क्या यहां भी कोई ऐसा अधिकारी बैठा था, जिसने मोहित कुमार को मिले वोट दूसरे प्रत्याशी के खाते में गिन लिए और मोहित को हारा हुआ घोषित कर दिया. तो इसे समझने के लिए वहां के आंकड़े देखने होंगे.
यहीं से पूरा मामला अदालत की ओर बढ़ता है और 33 महीने तक सरपंच रहने वाले कुलदीप सिंह को अब हारा हुआ प्रत्याशी घोषित कर दिया जाता है. तो अब सवाल ये है कि अगर पंचायत चुनाव में धांधली हो सकती है तो लोकसभा चुनाव और विधानसभा में क्यों नहीं?
इस घटना को विपक्ष वोट चोरी के तौर पर प्रचारित कर रहा है, जैसे वाराणसी में अजय राय खुद को कांग्रेसी कार्यकर्ता जीता हुआ सांसद बता रहे हैं और पीएम मोदी पर वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं. वैसे ही देश के कई हिस्सों में अब वोट चोरी को लेकर प्रदर्शन शुरू हो चुका है. पर सवाल है इन आरोपों में दम कितना है?अगर सबूत सच्चे हैं तो फिर राहुल गांधी चुनाव आयोग के सामने शपथपत्र भरने से इनकार क्यों कर रहे हैं? वो ये क्यों कह रहे हैं कि पिक्चर अभी बाकी है.
क्या चंडीगढ़ और पानीपत की घटना के सहारे विपक्ष पूरे देश में नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है? ये भी सवाल कई लोग पूछ रहे हैं. पर मूल सवाल ये भी है कि इतनी बड़ी गलती उन अधिकारियों से कैसे हो गई, जिनपर चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव करवाने और निष्पक्ष काउंटिंग का जिम्मा सौंपा था? लोकतंत्र की इस सुरक्षा में सेंध का जिम्मेदार कौन है?
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