गोरखपुर: जिला कारागार का एक पेड़ इन दिनों खास चर्चा में है. सुरक्षा के लिहाज से जिसकी डाल काटनी थी, अब उसी पेड़ और उसकी डाल की सुरक्षा की जा रही है. दो बंदी रक्षक उसकी 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं. पिछले महीने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोपी बंदी विपिन के फरार होने के बाद यह पेड़ जांच का सबसे अहम किरदार बन गया है.
31 जुलाई को फरार हुए विपिन के भागने के संभावित रास्ते तलाशते हुए जेल प्रशासन को दीवार के पास यह पेड़ और उसकी एक डाल मिली. अनुमान लगाया गया कि विपिन पेड़ पर चढ़ा होगा और डाल के सहारे दीवार तक पहुंचकर दूसरी तरफ कूद गया होगा.
इसी संभावना के आधार पर जेल प्रशासन की रिपोर्ट तैयार हुई थी और डाल काटने की तैयारी शुरू हो गई थी. लेकिन जेलर इस संभावना को अंतिम सच नहीं मान रहे. उन्हें आशंका है कि बंदी किसी दूसरे रास्ते से भी निकल सकता है.
जांच शुरू होने के बाद अधिकारियों को एहसास हुआ कि डाल काटने से घटनाक्रम से जुड़ा एक अहम साक्ष्य खत्म हो सकता है. इसलिए डाल काटने पर रोक लगा दी गई. अब जांच पूरी होने तक पेड़ और उसकी डाल को सुरक्षित रखा जाएगा. मौके पर अलग से फोर्स लगाकर निगरानी भी की जा रही है.
जांच टीम डाल की ऊंचाई, लंबाई, दीवार से दूरी, दीवार की ऊंचाई और पेड़ पर चढ़कर दीवार तक पहुंचने में लगने वाले समय जैसे कई बिंदुओं की पड़ताल कर रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपिन सच में पेड़ की डाल के सहारे दीवार फांदकर भागा था, या उसने कोई और रास्ता तलाश लिया था? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.