नई दिल्ली: लगभग 1500 साल पहले, 541 ईस्वी में शुरू हुई जस्टिनियन प्लेग, जो दुनिया की पहली दर्ज महामारी थी, के कारण लंबे समय तक अज्ञात रहे. इस महामारी ने पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में लाखों लोगों की जान ली, शहरों को तबाह किया, व्यापार को ठप किया और बीजान्टिन साम्राज्य को हिलाकर रख दिया. हालांकि इतिहास में इसके विनाशकारी प्रभावों का वर्णन था, लेकिन वैज्ञानिकों को इसके लिए जिम्मेदार जीवाणु का पक्का सबूत नहीं मिला था. अब हाल की रिसर्च ने यर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु का जीनोम अनुक्रमण (सीक्वेंसिंग) करके पुष्टि की है कि यही इस महामारी का कारण था. इस खोज ने न केवल सैकड़ों साल पुराने रहस्य को सुलझाया, बल्कि प्राचीन महामारियों के फैलने, शहरों पर प्रभाव और प्लेग के बार-बार उभरने की समझ को भी बढ़ाया है.
विश्व की पहली महामारी का कारण
541 से 750 ईस्वी के बीच चली जस्टिनियन प्लेग ने पूर्वी रोमन साम्राज्य में भारी तबाही मचाई. ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि शहरों में मौत का तांडव मचा, व्यापार रुक गया और समाज टूट गया. वैज्ञानिकों को शक था कि यह प्लेग था, लेकिन पक्का सबूत नहीं था. पहले पश्चिमी यूरोप में यर्सिनिया पेस्टिस के कुछ निशान मिले थे, लेकिन महामारी का केंद्र स्पष्ट नहीं था. अब जॉर्डन के जेराश शहर में एक सामूहिक कब्र से मिले मानव अवशेषों में यर्सिनिया पेस्टिस का डीएनए मिला है, जो इस महामारी का पहला ठोस सबूत है. जेराश, जो एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, इस महामारी में सामूहिक कब्रिस्तान बन गया, जिससे पता चलता है कि शहर कितनी जल्दी इस बीमारी से तबाह हो गए.
प्राचीन डीएनए से खुला रहस्य
वैज्ञानिकों ने जेराश के रोमन हिप्पोड्रोम के नीचे मिले आठ मानव दांतों से प्राचीन डीएनए (DNA) तकनीक का उपयोग करके यर्सिनिया पेस्टिस का जीनोम निकाला. विश्लेषण से पता चला कि पीड़ितों में इस जीवाणु के लगभग एकसमान प्रकार थे, जो 550 से 660 ईस्वी तक बीजान्टिन साम्राज्य में इसके व्यापक फैलाव को दर्शाता है. यह खोज ऐतिहासिक विवरणों को वैज्ञानिक सबूतों से जोड़ती है, जो तेजी से होने वाली मौतों और सामाजिक उथल-पुथल की व्याख्या करती है.
जेराश की सामूहिक कब्र और सामाजिक प्रभाव
जेराश के हिप्पोड्रोम का सामूहिक कब्र में बदलना जस्टिनियन प्लेग के सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है. व्यापार और संस्कृति के केंद्र रहे शहर इस महामारी की चपेट में आकर नष्ट हो गए. रिसर्च के अनुसार, इस बीमारी की गति और गंभीरता ने साम्राज्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलावों को जन्म दिया.
प्लेग का बार-बार लौटना
पैथोजन्स पत्रिका में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, यर्सिनिया पेस्टिस जस्टिनियन प्लेग से पहले भी इंसानों में मौजूद था. बाद की महामारियां, जैसे ब्लैक डेथ, अलग-अलग पशु स्रोतों से उभरीं, न कि किसी एक मूल स्ट्रेन से. यह दिखाता है कि प्लेग एक बार की घटना नहीं, बल्कि बार-बार उभरने वाली बीमारी है, जो मानव इतिहास को बार-बार प्रभावित करती रही है.
आधुनिक प्रासंगिकता
यह अध्ययन बताता है कि महामारियां मानव समूहों, आवाजाही और पर्यावरणीय परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं. रिसर्चर रेज़ एच. वाई. जियांग ने कहा, "प्लेग लगातार विकसित होता है और इसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है. कोविड-19 की तरह, सतर्कता, तैयारी और वैज्ञानिक समझ ही ऐसी बीमारियों से निपटने का रास्ता है." जस्टिनियन प्लेग का अध्ययन आज के समय में महामारियों के फैलाव, विकास और सामाजिक प्रभाव को समझने में मदद करता है, जिससे भविष्य की तैयारियों के लिए रणनीतियां बनाने में सहायता मिलती है.