पटना: बिहार के एक घर में ऐसा क्या हो रहा था, जिसके लिए बिहार सरकार को ब्लैक कमांडो भेजने पड़े? आतंकियों से लड़ने के लिए बनी एटीएस मकान को घेरने पहुंच गई, क्या उस घर में आतंकी छिपे थे या वो सिर्फ अपराधी थे? डेढ़ घंटे तक बिहार में जो कुछ भी हुआ उसकी तस्वीरें देख ऐसा लगता है फिल्म की शूटिंग चल रही हो, लेकिन यहां न कोई फिल्मी हीरो था, न विलेन, पूरी कहानी हकीकत है. सीएम नीतीश के आवास से करीब 10 किलोमीटर दूर एक मकान में क्या हो रहा था, वो कौन लोग थे, जो मकान में छिपे थे, डेढ़ घंटे के भीतर क्या-क्या हुआ? वो लेडी ऑफिसर कौन थी, जिनकी तस्वीरें अब वायरल हो रही हैं?पटना के एसएसपी ने घटना के बाद क्या बताया, पकड़े गए आरोपियों ने क्या बताया पूरी बात इस रिपोर्ट के माध्यम से बताएंगे.
दरअसल, पटना के कंकड़बाग इलाके का रामलखन सिंह पथ पर अचानक फायरिंग की आवाज आती है, वक्त हो रहा था दोपहर करीब 2 बजकर 16 मिनट. आसपास के लोग घबरा उठते हैं, तुरंत पुलिस को फोन जाता है, करीब 23 मिनट बाद यानि 2 बजकर 39 मिनट पर पुलिस पहुंचती है, अगले 12 मिनट में अपराधी चारों तरफ से घिर जाते हैं, नतीजा वो एक तीन मंजिला मकान में फायरिंग करते हुए घुसते हैं. धीरे-धीरे कई थानों की टीम वहां पहुंच जाती है, करीब 80 पुलिसकर्मी और 5 एसएचओ के साथ कई सब इंस्पेक्टर मकान को घेर लेते हैं, लेकिन कहते हैं हालत जब ज्यादा बिगड़ जाए तो इलाज भी बड़ा करना होता है. इसलिए ATS कमांडो और SWAT की टीम बुलाई जाती है, जो करीब डेढ़ घंटे तक ऑपरेशन सरेंडर चलाती है.
SSP ने बताई ऑपरेशन सरेंडर की कहानी
आसपास के कई मकान खंगाले जाते हैं और आखिर में बिना एक भी गोली चलाए चार अपराधियों को पुलिस पकड़ लेती है. 4 बजकर 15 मिनट पर ये जानकारी सामने आती है कि 4 आरोपी पकड़े गए हैं, जबकि कई फरार हो चुके हैं. एसएसपी अवकाश कुमार कहते हैं ऑपरेशन सफल रहा. कंकड़बाग इलाके का रहने वाले धर्मेन्द्र सिंह यादव अपने गुर्गों के साथ जमीन कब्जाने की नीयत से यहां पहुंचा था, लेकिन तभी पुलिस को ख़बर लग गई, वो आदतन अपराधी है, बाकी के आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है.
कौन है सिंघम लेडी इंस्पेक्टर, जिनकी तस्वीर हुई वायरल
उधर ऑपरेशन खत्म हुआ, और इधर सोशल मीडिया पर एक लेडी इंस्पेक्टर की तस्वीर वायरल होने लगी. जो हाथों में पिस्टल लिए आरोपियों के घर के बाहर मुस्तैद खड़ीं थी, कोई इनकी बहादुरी की तारीफ कर रहा था, कोई कह रहा था पुलिस ऐसी ही होनी चाहिए, इनका नाम है निशा, जो कंकड़बाग के ही एक थाने में तैनात हैं. इस घटना को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है, तेजस्वी यादव ने कहा लॉ एंड ऑर्डर का क्रिमिनल डिसऑर्डर हो गया है तो वहीं सत्ता पक्ष के लोग पुलिस की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं. एसएसपी अवकाश कुमार जिनके नेतृत्व में ये ऑपरेशन चलाया गया, उन्हें कुछ महीने पहले ही पटना का एसएसपी बनाया गया है.
कौन हैं एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अवकाश कुमार
2012 बैच के आईपीएस ऑफिसर अवकाश कुमार भोजपुर के सिमराव गांव के रहने वाले हैं. IIT BHU से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. 4 साल डीआरडीओ में बतौर साइंटिस्ट काम किया, उसके बाद यूपीएसएसी की परीक्षा पास की, एसपी बने और बिहार के कई जिलों में सेवाएं दी. कहते हैं अपराधी इनके नाम से ही खौफ खाते हैं. गया, आरा, बेगूसराय और दरभंगा में ये अब तक तैनात रह चुके हैं. बेगुसराय में तीन बदमाशों का एनकाउंटर कर सुर्खियों में आए और अब इन अपराधियों को पकड़कर तारीफें बटोर रहे हैं.