Lok sabha Election 2024: उत्तर प्रदेश में क्यों पिछड़ गई बीजेपी, कहां हो गई चूक

Global Bharat 05 Jun 2024 12:48: PM 3 Mins
Lok sabha Election 2024: उत्तर प्रदेश में क्यों पिछड़ गई बीजेपी, कहां हो गई चूक

उत्तर प्रदेश में इस बार भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों पर पानी फिर गया. बीजेपी पिछली बार से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही थी, लेकिन इस बार लगभग आधी सीटों का नुकसान हो गया. आखिर बीजेपी को इतनी कम सीटें कैसे मिलीं. इस बार जातीय समीकरण से लेकर संविधान और रोजगार के मुद्दों ने बीजेपी को पीछे धकेल दिया. 

1- कौशाम्बी-कौशाम्बी में जहां बीजेपी ने दलित बिरादरी से आने वाले विनोद सोनकर को टिकट दिया था. वहीं समाजवादी पार्टी ने पासी चेहरमे इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा था. बताया जा रहा है कि विनोद सोनकर के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी काफी ज्यादा थी. इतना ही नहीं इस सीट पर कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया ने भी विनोद सोनकर को समर्थन देने से इनकार कर दिया. जनता का गुस्सा ही था कि सोनकर एक लाख से ज्यादा वोटों से पिछड़ गए.

2- बांदा-बांदा सीट पर जहां बीजेपी ने दो बार के सांसद आरके सिंह पटेल को उतारा था. वहीं सपा ने कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल को टिकट दिया था. इस सीट पर कृष्णा देवी 70 हजार से ज्यादा वोटों से आगे हैं. बताया जा रहा है कि बांदा सीट पर पहले से ही आरके सिंह पटेल के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था. इतना ही नहीं ब्राह्मणों के बड़े तबके में भी उनके खिलाफ नाराजगी थी. जब बीएसपी ने ब्राह्मण चेहरे को उतारा तो चर्चा शुरू हुई कि ब्राह्मण भी बीजेपी छोड़कर हाथी की सवारी करेगा, लेकिन जातीय समीकरण सपा प्रत्याशी की तरफ हुए.

3- बाराबंकी-बाराबंकी से कांग्रेस ने पीएल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को टिकट दिया था. इस सीट पर शुरू से ही कांटे की टक्कर बताई जा रही थी. दरअसल यहां से सांसद उपेंद्र रावत का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद बीजेपी ने उनका टिकट बदलकर राजरानी रावत को दे दिया था. लेकिन यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी और दलितों के एक बड़े तबके ने कांग्रेस का साथ दिया और तनुज पुनिया 2 लाख 15 हजार वोटों से लीड कर रहे हैं.

4. सुल्तानपुर-इस सीट से भाजपा ने पूर्व मंत्री मेनका गांधी को चुनावी मैदान में उतारा था, वहीं सपा से पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद और बसपा से उदराज वर्मा को मैदान में उतारा गया था. लेकिन मेनका गांधी बीजेपी को जीत नहीं दिला पाईं. अब सवाल ये है कि आखिर मेनका गांधी जैसी दिग्गज बीजेपी नेता कैसे हार गईं. तो जानकारों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण मुकाबले का त्रिकोणीय होना है.

भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के लिए सपा-बसपा के बीच जोर आजमाइश थी. सपा-बसपा ने इस बार भाजपा के एकमुश्त वोट माने जाने वाले कुर्मी व निषाद बिरादरी के मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए जातिगत समीकरण साधने के लिए प्रत्याशी दिए थे. तो जानकारों का कहना है कि यही वजह रही जो मेनका गांधी हार गईं.

5. जौनपुर-  इस सीट पर सपा के बाबू कुशवाह सिंह ने जीत दर्ज की और  बीजेपी के कृपाशंकर को हरा दिया था. जौनपुर जैसी सीटों पर भाजपा की हार बताती है कि किस कदर क्षत्रियों की नाराजगी भारी पड़ गई. क्षत्रियों की नाराजगी से बीजेपी को इन चार लोकसभा सीटों पर तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा है. पश्चिमी यूपी में लगातार कई जिलों में राजपूतों ने सम्मेलन करके कसम दिलाई गई कि किसी भी हालत में बीजेपी को वोट नहीं देना है. अगर ठीक से कोशिश की गई होती तो ये सम्मेलन रोके जा सकते थे.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर बसपा प्रमुख मायावती तक ने क्षत्रियों से नाराजगी के मुद्दे को चुनावी मैदान में उछाला. मुजफ्फरनगर में क्षत्रियों के नाराजगी का मुद्दा खूब गरमाया गया. उत्तर प्रदेश में क्षत्रिय वोट बैंक की बात करें तो यहां पर कुल आबादी का सात फीसदी इस वर्ग से आता है. ऐसे में यह वर्ग जीत-हार के बीच अंतर पैदा करने वाले वोट बैंक के रूप में माना जाता है. इसके अलावा क्षत्रिय वोट बैंक से जुड़े अन्य वोटर भी महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर देते हैं.

बता दें कि अवध इलाके में 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 14 में से 13 सीटें जीतीं थीं, लेकिन इस बार जातीय समीकरण ऐसे बदले इन सीटों पर बीजेपी अपना कमल नहीं खिला पाई. समाजवादी पार्टी में दलित के पासी समाज के तीन सबसे बड़े चेहरे अवधेश पासी, इंद्रजीत सरोज और आर.के. चौधरी को अपनी पार्टी में लाकर इन्हें टिकट से नवाजा. इसके बाद इस बिरादरी ने बीजेपी से छोड़कर कई सीटों पर सपा को पूरा समर्थन दिया है.

कुर्मी बिरादरी जो कि बीजेपी का ओबीसी में सबसे सॉलिड वोट बैंक हुआ करता था उसमें भी बड़ी सेंध समाजवादी पार्टी ने लगा दी. सपा ने कुर्मी बिरादरी से 10 टिकट दिए, जिसका असर कई सीटों पर दिखाई दिया और उत्तरप्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सूबे में बीजेपी को करारा झटका लग गया.

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