नई दिल्ली: कनाडा के टोरंटो में माल्टन गुरुद्वारे के पास खालिस्तानी समर्थकों ने 4 मई 2025 को एक हिंदू विरोधी परेड निकाली, जिसमें 8 लाख हिंदुओं को भारत भेजने की मांग की गई. परेड में एक बड़ा ट्रक था, जिसमें जेल का मॉडल बनाया गया था. इस जेल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के पुतले कैद दिखाए गए. इस परेड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे देखकर हिंदू समुदाय में गुस्सा और चिंता फैल गई है. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब हाल ही में कनाडा में एक सिख गुरुद्वारे और हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी समर्थक नारों के साथ तोड़फोड़ की गई थी.
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परेड में हिंदू विरोधी नारे और पुतले
परेड में खालिस्तानी समर्थकों ने न केवल हिंदुओं के खिलाफ नारे लगाए, बल्कि भारतीय नेताओं के खिलाफ भी आपत्तिजनक प्रदर्शन किया. वीडियो में दिखा कि ट्रक पर बनी नकली जेल में मोदी, शाह और जयशंकर के पुतले नारंगी जेल वर्दी में थे. कनाडा के हिंदू समुदाय के नेता शॉन बिंदा ने इस परेड को “खालिस्तानी आतंकवादी समूह की खुली हिंदू विरोधी नफरत” करार दिया. उन्होंने X पर लिखा, “यह भारत सरकार के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि हिंदुओं के खिलाफ नफरत है. यह वही समूह है, जो कनाडा के सबसे घातक हमले (1985 का एयर इंडिया बम विस्फोट) के लिए कुख्यात है.” यह हमला 329 लोगों की जान लेने वाला था, जिसे खालिस्तानी अलगाववादियों ने अंजाम दिया था.
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कनाडाई पत्रकार ने उठाए सवाल
कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने भी इस वीडियो को शेयर कर कनाडा की नई सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने X पर लिखा, “खालिस्तानी समूह समाज के लिए सबसे घृणित विदेशी फंडिंग वाला खतरा हैं. क्या नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार पुराने पीएम जस्टिन ट्रूडो से अलग होगी?” यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि मार्क कार्नी ने हाल ही में 28 अप्रैल 2025 को हुए चुनाव में लिबरल पार्टी को जीत दिलाई है. बोर्डमैन ने यह भी बताया कि उसी रात वैंकूवर में एक गुरुद्वारे और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी नारों के साथ तोड़फोड़ हुई थी.
हिंदू संगठनों ने जताया गुस्सा
उत्तर अमेरिका के हिंदू गठबंधन (CoHNA) ने इस घटना को “शर्मनाक” बताया और कहा, “दुनिया पहले भी इस तरह की नफरत देख चुकी है. क्या कनाडा के स्थानीय, प्रांतीय और राष्ट्रीय संस्थान इस पर ध्यान देंगे? क्या मानवाधिकार संगठन या मीडिया इसे कवर करेंगे?” हिंदू कनाडाई फाउंडेशन (HCF) ने भी बयान जारी कर कहा कि ऐसी हरकतें हिंदू कनाडाई समुदाय के खिलाफ नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती हैं. उन्होंने सभी सांसदों से इस नफरत भरे बयानबाजी की निंदा करने की मांग की.
वैसाखी परेड में भी विवाद
इससे पहले, 19 अप्रैल 2025 को सरे में हुई खालसा दिवस वैसाखी परेड में भी खालिस्तानी झंडे और भारत विरोधी नारे देखे गए थे. इस परेड में भी मोदी, शाह और जयशंकर के “वांटेड” पोस्टर प्रदर्शित किए गए थे, जिसकी काफी आलोचना हुई थी. परेड में 5.5 लाख लोग शामिल हुए थे, जिसमें खालिस्तानी नारे और भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी देखा गया. सरे और वैंकूवर में गुरुद्वारे और मंदिरों पर “खालिस्तान जिंदाबाद” जैसे नारे लिखे गए थे, जिसे स्थानीय सिख समुदाय ने भी निंदा की थी.
भारत-कनाडा तनाव गहराया
यह घटना भारत और कनाडा के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल कर सकती है. भारत ने बार-बार कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों को जगह देने की शिकायत की है. पिछले साल, कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया था. नई सरकार के तहत कनाडा का रुख क्या होगा, यह देखना बाकी है.