मुलायम सिंह यादव की सरकार में जो खुद को अमेठी का किंग समझता था, वो योगी सरकार में सबसे बड़ा किंगपिन कैसे साबित हुआ, एक लड़की के साथ किए गए गुनाह ने कैसे उसे मंत्री की कुर्सी से उतारकर सलाखों के पीछे पहुंचाया और 7 साल बाद जब उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में क्या हुआ, ये सुनकर आप भी कहेंगे सरकारी वकील ऐसे ही होने चाहिए. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान की डबल बेंच में सुनवाई शुरू होती है.
गायत्री प्रजापति के वकील कहते हैं...जज साहब, मेरे मुवक्किल को साल 2017 में गिरफ्तार किया गया था, साढ़े सात साल से वो जेल में बंद हैं, साढ़े तीन साल पहले उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, अब उन्हें जमानत मिलनी चाहिए, लेकिन योगी सरकार के वकील इसका पुरजोर विरोध करते हैं, वो कहते हैं ऐसे लोगों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए, अगर आप इनका बैकग्राउंड देखेंगे तो शायद यही कहेंगे, क्योंकि गायत्री प्रजापति जैसे लोग समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं, क्योंकि गायत्री प्रजापति पर चित्रकूट की महिला ने जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद गंभीर थे.
महिला ने साफ कहा था कि मैं गायत्री प्रजापति के आवास पर गई तो उसने मुझे और मेरी नाबालिग बेटी दोनों के साथ गलत किया, इस मामले में कुल तीन लोगों को उम्रकैद की सजा हुई है, पर हैरानी की बात ये है कि अपने नेताओं पर ऐसे आरोप लगने के बाद सपा उनका साथ देती है. आप तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कैसे गायत्री प्रजापति मुलायम सिंह यादव की कदमों में बैठता था, अखिलेश सरकार में खनन जैसे सबसे अहम मंत्रालय का जिम्मा संभालता है और उसके बाद करोड़ों की काली कमाई करता है.
कागजों पर सरकार को ये बताता है कि मेरे पास सिर्फ 72 लाख की संपत्ति है, लेकिन जब ईडी की एंट्री होती है तो अधिकारी नोट गिनते-गिनते थक जाते हैं, करीब 35 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्ति का पता चलता है. ईडी के अधिकारी गायत्री प्रजापति की पत्नी और बेटे से पूछताछ करते हैं, तो वो पूछताछ में उनकी तबियत बिगड़ जाती है, क्योंकि ईडी के सामने सबसे बड़ा सवाल ये था कि एक पेंटर मजदूर 12 सालों के भीतर कैसे करोड़ों का मालिक बन जाता है.
पहले विधायक, फिर मंत्री बनता है, और उसके बाद अपनी कुर्सी का नाजायज फायदा उठाता है. और उसे कोई रोक नहीं पाता, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फरवरी 2017 में गायत्री प्रजापति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होता है, और मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाते हैं, एक-एक कर माफियाओं और महिलाओं के खिलाफ गलत करने वालों पर शिकंजा कसा जाता है.
हाईप्रोफाइल मामला होने के बावजूद सरकारी वकील इस केस में इतनी संजीदगी से पैरवी करते हैं कि एक पूर्व कैबिनेट मंत्री को अदालत उम्रकैद की सजा सुनाती है. जिसके बाद साल 2020 में एक बार गायत्री प्रजापति को जमानत मिलती है, लेकिन वो जैसे ही बाहर आता है, यूपी पुलिस उसे दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लेती है, और अब वो जेल से बाहर आने के लिए बार-बार छटपटा रहा है, याचिकाएं लगवा रहा है, लेकिन हर बार गायत्री को झटका लगता है, जमानत की मांग खारिज हो जाती है.