गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, परिवार और पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार हो चुका था, जिसकी तेरहवीं तक की सभी रस्में पूरी हो गई थीं और जिसकी हत्या का मुकदमा भी दर्ज हो चुका था, वही शख्स 39 दिन बाद अचानक अपने घर लौट आया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर गिरधारी सिंह बिष्ट जिंदा हैं, तो आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था?
मामला मसूरी थाना क्षेत्र का है। 13 जून को पुलिस को एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली थी। शव की पहचान के लिए पुलिस ने गिरधारी सिंह बिष्ट के परिजनों को बुलाया। परिजनों ने शव को गिरधारी का मान लिया। पहचान के आधार पर पोस्टमार्टम कराया गया और बाद में शव परिवार को सौंप दिया गया। इसके बाद पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। घर में मातम छा गया और तेरहवीं तक की सभी धार्मिक रस्में भी पूरी कर दी गईं। परिवार और रिश्तेदारों ने यही मान लिया कि गिरधारी अब इस दुनिया में नहीं रहे।
परिजनों का आरोप था कि गिरधारी की हत्या की गई है। इसी आधार पर कुछ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। मामले को लेकर कौशांबी थाने के बाहर प्रदर्शन भी हुआ। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। मामला लगातार गंभीर होता जा रहा था।
लेकिन गुरुवार को कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। करीब 39 दिन बाद गिरधारी सिंह बिष्ट अचानक अपने घर पहुंच गए। घर के बाहर पहले लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। कुछ पल तक सभी यही सोचते रहे कि कहीं वे किसी और को तो नहीं देख रहे। लेकिन जैसे ही परिवार और आसपास के लोगों ने उन्हें करीब से देखा, पूरे इलाके में खबर आग की तरह फैल गई।
घर में चीख-पुकार मच गई। जो परिवार पिछले कई दिनों से शोक में डूबा था, उसकी आंखों के सामने वही व्यक्ति जिंदा खड़ा था, जिसकी तेरहवीं हो चुकी थी। कोई खुशी से रो पड़ा, कोई स्तब्ध रह गया। देखते ही देखते कल्पना अपार्टमेंट के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
अब इस पूरे मामले ने पुलिस के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर गिरधारी सिंह बिष्ट जिंदा हैं, तो जिस अज्ञात शव की पहचान उनके रूप में हुई थी, वह आखिर किसका था? पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या केवल परिजनों की पहचान के आधार पर शव सौंप दिया गया या पहचान की पुष्टि के लिए अन्य वैज्ञानिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया गया था?
इतना ही नहीं, जिस हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी, उसकी जांच की दिशा भी अब पूरी तरह बदल सकती है। पुलिस को अब यह पता लगाना होगा कि गिरधारी इतने दिनों तक कहां थे, किन परिस्थितियों में लापता रहे और जिस अज्ञात व्यक्ति का अंतिम संस्कार हुआ, उसकी असली पहचान क्या है।
गाजियाबाद का यह मामला अब एक बड़ी पहेली बन गया है। जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार ने अंतिम विदाई दे दी, तेरहवीं कर दी और हत्या का मुकदमा तक दर्ज करा दिया, वही 39 दिन बाद जिंदा घर लौट आया। अब पूरे मामले की सबसे बड़ी गुत्थी यही है कि आखिर उस अज्ञात शव की पहचान क्या थी और इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। पुलिस की आगे की जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे।