''भारत को तोड़ना चाहते हैं राक्षसी ताकतें, कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी शामिल''...मोहन भागवत का विजयदशमी पर बड़ा बयान

Amanat Ansari 20 Oct 2026 11:05 AM 1 Mins
''भारत को तोड़ना चाहते हैं राक्षसी ताकतें, कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी शामिल''...मोहन भागवत का विजयदशमी पर बड़ा बयान

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयदशमी के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन में गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर सक्रिय ‘राक्षसी ताकतें’ भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने तथा तोड़ने की साजिश रच रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन ताकतों को कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी सत्ता की लालसा और विवेकहीनता के कारण सहयोग दे रहे हैं.

भागवत ने कहा कि भारत, हिंदू और संघ को किस तरह से नष्ट किया जा सकता है यही दुष्ट शक्तियां सोचती हैं, योजनाएं बनाती हैं और उन पर अमल करती हैं. कुछ लोग अपनी प्रकृति के अनुसार इसमें शामिल हो जाते हैं. सत्ता के छोटे-मोटे स्वार्थ और विवेक की कमी के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं.

उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में चल रहे अशांति के हवाले देते हुए कहा कि पश्चिम से एक ऐसा तूफान आया है जो हर तरह की व्यवस्था, शालीनता, कल्याण तथा सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों को नष्ट करना चाहता है. भागवत ने स्पष्ट किया कि वे कहते हैं कि रिजीम चेंज से स्थिति बदलेगी, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और आज भी नहीं हो रहा है.

आरएसएस प्रमुख ने आरोप लगाया कि दुनियाभर में ऐसे रिजीम चेंज ऑपरेशन इसलिए चलाए जाते हैं ताकि अपने स्वार्थ साधने वाले लोग और उनके पिट्ठू सत्ता में बने रहें. भारत की बढ़ती शक्ति इन प्रयासों में बाधा बन रही है, इसलिए भारत इन ताकतों का अंतिम लक्ष्य बन गया है. उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं.

हालांकि भागवत ने यह भी जोड़ा कि पिछले कुछ दशकों में भारत की दृढ़ नीतियों और मजबूत नेतृत्व ने इन साजिशों पर असर डाला है. युवा पीढ़ी में देश और दुनिया के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागने से भी इन दुष्ट शक्तियों की योजनाएं विफल हुई हैं.

आंदोलनों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समस्याएं होंगी तो आंदोलन भी होंगे, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य सिर्फ विरोध नहीं बल्कि समाधान होना चाहिए. चाहे आंदोलन करने वाले समूह हों या सरकार, प्रशासन और राजनीतिक नेता सभी का लक्ष्य समाधान निकालना होना चाहिए. भागवत का यह बयान विजयदशमी समारोह में दिया गया, जिसमें उन्होंने समाज में एकता, स्वधर्मनिष्ठा और समाधानमूलक सोच पर जोर दिया.

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