जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर पुलिस की तीखी आलोचना की है. कोर्ट ने कहा कि कोई भी आपराधिक जांच अंधविश्वास या अलौकिक शक्तियों के आधार पर नहीं की जा सकती. न्यायमूर्ति मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने नागौर के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि चोरी के मामले की जांच को दूसरे थाने के किसी सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को सौंप दिया जाए.
मामला क्या है?
7 मार्च 2026 को याचिकाकर्ता के घर में चोरी हुई थी, जिसमें सोने-चांदी के आभूषण और नकदी चोरी हो गई. शुरू में इस मामले की जांच हेड कांस्टेबल रति राम को सौंपी गई. याचिकाकर्ता के अनुसार, जब केस नहीं सुलझा तो रति राम ने शिकायतकर्ता और कुछ गांव वालों को अलवर ले जाकर एक तांत्रिक के पास पहुंचाया. तांत्रिक ने याचिकाकर्ता की बहू के पिता मोहनराम को चोर बताया, जिसके बाद पुलिस ने उसी दिशा में जांच शुरू कर दी.
याचिकाकर्ता की ओर से वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने कोर्ट में दलील दी कि कानून में कहीं भी तांत्रिक या किसी ज्योतिषी/तांत्रिक के कहे आधार पर जांच करने का कोई प्रावधान नहीं है. जांच पूरी तरह सबूतों पर आधारित होनी चाहिए.
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच अधिकारी अलवर में तांत्रिक के ठिकाने पर गया था. इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष और कानून के अनुसार ही होनी चाहिए. कोर्ट ने आदेश कि मौजूदा जांच अधिकारी को हटाया जाए और मामले की जांच 15 दिनों के अंदर नए अधिकारी को सौंप दी जाए.