लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे ही बीजेपी के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अनुप्रिया पटेल से लेकर संजय निषाद तक सरकार पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. वहीं, जयंत चौधरी और ओम प्रकाश राजभर भी नाराज चल रहे हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों में बढ़ती नाराजगी के बाद समाजवादी पार्टी अपने खेमे में करने के लिए जाल बुनना शुरु कर दी है. बीजेपी के सहयोगी दलों में बढ़ती नाराजगी के बाद सपा खुश है. पार्टी के नेताओं के द्वारा कोई भी बयान नहीं दिया जा रहा है. लगातार ओम प्रकाश राजभर पर भी टिप्पणी करने वाले सपा सुप्रीमों कुछ महीनों से कुछ भी बचने से बोलते हुए दिखाई दे रहे हैं.
दरअसल, यूपी में चुनाव से पहले बीजेपी के सहयोगी दल प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं. एक मंच पर संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर और आशीष पटेल नजर आ रहे हैं. तीनों मंत्री रहने के बाद भी सरकार से खफा है और एक साथ अपनी शक्ति को दिखा रहे हैं. जयंत चौधरी भी इन दिनों बीजेपी से दूरी बनाए हुए हैं. राजनीति के सलाहकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव की आहट के बाद सीट को लेकर नाराजगी है. अगर बीजेपी के साथ सामंजस्य बन जाता है तो सारे दल साथ में चुनाव लड़ेंगे. वरना सपा की आस पूरी हो जाएगी.
अनुप्रिया का कुर्मी बाहुल्य जिलों में दबदबा
अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का कुर्मी बाहुल्य सीटों पर दबदबा है. इनमें, मिर्जापुर, प्रतापगढ़, बांदा, जौनपुर व वाराणसी जिले हैं. 2014 में बीजेपी के साथ जुड़ा अपना दल एस अभी भी साथ में है, लेकिन कुछ महीनों से अपना दल एस से यूपी कैबिनेट में मंत्री आशीष पटेल प्रदेश सरकार व कुछ अधिकारियों पर हमलावर नजर आए थे. प्राविधिक शिक्षा विभाग में विभागाध्यक्ष की भर्ती में 25-25 लाख रुपये देकर भर्ती करने के आरोप के बाद आशीष पटेल ने जमकर भड़ास निकाली थी और एनकाउंटर करने तक कि बात कह दी थी.
निषादों के नेता है संजय निषाद
निषाद पार्टी के नेता और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद का दबदबा गोरखपुर, महराजगंज, मिर्जापुर सहित निषाद बाहुल्य क्षेत्रों में है. गंगा के किनारे बसे वोटरों में संजय निषाद की पैठ मजबूत है. सपा के साथ चुके संजय निषाद इन दिनों बीजेपी से नाराज चल रहे हैं. हो सकता है कि आने वाले दिनों में संजय निषाद खुलकर मोर्चेबंदी करें. फिलहाल निषाद भी आशीष पटेल के साथ नजर आ रहे हैं.
पलटने में माहिर है राजभर
सुभासपा प्रमुख व प्रदेश सरकार में ओम प्रकाश राजभर भी पलटने में माहिर है. बीजेपी का साथ छोड़कर 2022 में सपा के साथ आए राजभर ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि, सरकार नहीं बनने के बाद उन्होंने पलटी मार लिया और बीजेपी में चले गए. राजभर भी इन दिनों नाराज चल रहे हैं. पीला गमछा वाले नेताजी को थाने में फूल इज्जत की बात कहने के बाद जलालत झेल रहे राजभर साहब नाखुश नजर आ रहे हैं.
पश्चिमी यूपी में जयंत का दमखम
पश्चिमी यूपी नें बीजेपी की सहयोगी दल आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी भी बीजेपी से दूरी बनाकर चल रहे हैं. आरएलडी द्वारा प्रदेश में पंचायत चुनाव अकेले लड़ने के ऐलान के बाद से ही सियासी तपिश बढ़ गई है. जयंत चौधरी भी बीजेपी से जुदा चल रहे हैं. ऐसे में उनके ऐलान को 2027 विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. फिलहाल उनकी दूरियां इस समय खूब चर्चाओं में है.
सपा से चाचा संभालेगे मोर्चा
बीजेपी के सहयोगी दलों को अपने पाले में करने के लिए सपा की ओर से चाचा शिवपाल यादव मोर्चा थामेंगे. सूत्रों की माने तो शिवपाल यादव सभी नेताओं से संपर्क भी कर लिए हैं. हालांकि, अभीतक कोई निर्णय नहीं निकल सका है. अगर बीजेपी सहयोगी दलों की नाराजगी दूर नहीं करती है और सपा की ओर रुख करते हैं तो बड़ा नुकसान हो सकता है.