बिजनेस डेस्क: वैश्विक स्तर पर गहराए भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 8 जुलाई 2026 को बड़ी गिरावट की सुनामी देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ पिछले महीने हुआ अंतरिम शांति समझौता (Ceasefire/MoU) 'पूरी तरह खत्म' होने के आधिकारिक एलान के बाद घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक— सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह धड़ाम हो गए। इस अचानक आई बिकवाली (Panic Selling) से निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है और बाजार का पूरा सेंटिमेंट मंदी की ओर शिफ्ट हो गया है।
शेयर बाजार क्रैश का पूरा आधिकारिक डेटा (Stock Market Numbers)
बाजार टूटने की सबसे बड़ी वजह (Why Market Crashed?)
शेयर बाजार के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार में मचे इस हाहाकार की मुख्य वजह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के सैन्य और पोर्ट ठिकानों पर की गई बड़ी एयरस्ट्राइक और राष्ट्रपति ट्रम्प का नाटो समिट से आया हालिया बयान है। ट्रम्प ने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी और वाणिज्यिक तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद ईरान के साथ शांति समझौता बनाए रखना 'समय की बर्बादी' है। ट्रम्प के इस कड़े रुख से निवेशकों में डर बैठ गया है कि मिडिल ईस्ट का यह संकट अब एक बड़े और लंबे युद्ध में बदल सकता है।
कच्चे तेल और भारत पर पड़ने वाला असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 फीसदी कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से आयात करता है। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध छिड़ने से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। तेल की कमी के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दामों में एक बार फिर तेजी आनी शुरू हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी, जिससे रुपया कमजोर होगा और देश में महंगाई व चालू खाता घाटा (Trade Deficit) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसी वित्तीय अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने इक्विटी (शेयरों) से अपना पैसा निकालकर सोने और सरकारी बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित ठिकानों में डालना शुरू कर दिया है।