''कोई भी आप पर भरोसा नहीं करेगा...आप फेल रहे...'' सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता के 2016 मध्यस्थता फैसलों को लागू करने में देरी पर केंद्र को लगाई कड़ी फटकार

Amanat Ansari 02 Nov 2026 07:12 PM 2 Mins
''कोई भी आप पर भरोसा नहीं करेगा...आप फेल रहे...'' सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता के 2016 मध्यस्थता फैसलों को लागू करने में देरी पर केंद्र को लगाई कड़ी फटकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2004 और 2016 के मध्यस्थता फैसलों को लागू करने में देरी पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. सरकार ने वेदांता लिमिटेड और रवा ऑयल (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में आए दशकों पुराने विदेशी मध्यस्थता फैसलों को लागू होने से रोका था. कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस तरह की कानूनी कार्यवाही से भारत की मध्यस्थता व्यवस्था में भरोसा कम होगा.

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के मध्यस्थता निर्णयों को लागू करने के नजरिये पर सवाल उठाए. पीठ ने कहा, “ये कैसे तर्क हैं? आप इस तरह मध्यस्थता निर्णय को लागू करने के चरण में ही फेल रहे हैं?” भारत सरकार बनाम वेदांता के इस मामले में पीठ ने मध्यस्थता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाया और सम्मेलनों-सेमिनारों में मध्यस्थता पर चर्चाओं का हवाला दिया, जबकि पक्षकार निर्णयों को लागू करने का विरोध करते रहे. पीठ ने सरकार को चेतावनी दी कि इस तरह के मुकदमे मध्यस्थता प्रक्रिया में विश्वास को कम कर सकते हैं. “कोई भी आप पर भरोसा नहीं करेगा,” सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर टिप्पणी की.

यह विवाद कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ‘रव्वा’ तेल क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार और कंपनियों के एक समूह के बीच 1994 में हुए प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुआ. कॉन्ट्रैक्ट की व्याख्या को लेकर विवाद के कारण कुआलालंपुर में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हुई. अक्टूबर 2004 में मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने एक आंशिक फैसला सुनाया, लेकिन इसमें रकम तय करने का मुद्दा अनसुलझा रह गया. 2011 में मलेशियाई संघीय न्यायालय ने इस फैसले को बरकरार रखा. जुलाई 2014 में सरकार ने कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, जिसमें लगभग 99 मिलियन डॉलर की वसूली की मांग की गई. अक्टूबर 2016 में पुनर्गठित न्यायाधिकरण ने अंतिम फैसला सुनाया. सरकार ने इस फैसले को लागू करने का विरोध किया.

1 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस जसमीत सिंह ने सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि फैसले को लागू करने की याचिका समय-सीमा के भीतर है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं पाया और अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा, “हमारी राय में, हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले और आदेश में कोई गलती नहीं है.” केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी पेश हुए, जबकि वेदांता और रवा ऑयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल पेश हुए थे.

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