West Bengal Legislative Assembly Elections SIR: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद उभर आया है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण छूट दी है. पार्टी अब मतदाता सूची से नाम हटाए जाने (SIR प्रक्रिया) को लेकर नई याचिकाएं दायर कर सकती है, खासकर उन सीटों पर जहां हार का अंतर बेहद कम था.
TMC का मुख्य आरोप क्या है?
TMC का कहना है कि चुनाव से पहले Special Intensive Revision (SIR) के दौरान लाखों नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जिसका असर कई सीटों के नतीजों पर पड़ा. पार्टी का दावा है कि कम से कम 31 विधानसभा सीटों पर हार-जीत का अंतर उन हटाए गए वोटों की संख्या से कम था. TMC ने इसे एक तरफा साजिश बताया है.
मतदाता सूची में बड़े बदलाव
चुनाव नतीजों के मुताबिक, BJP को 207 सीटें (पूर्ण बहुमत), TMC: 80 सीटें मिलीं. चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया के दौरान राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या में भारी कटौती हुई. करीब 60-62 लाख नाम सूची से हटाए गए. TMC और कुछ विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे खास समुदायों (मुस्लिम और कुछ हिंदू समूहों जैसे मतुआ) के मतदाताओं पर असर पड़ा. BJP और चुनाव आयोग का पक्ष है कि यह फर्जी, दोहरे और अवैध नामों को हटाने की पारदर्शी कवायद थी, जो लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने के लिए जरूरी थी. आंकड़ों में देखा गया कि जिन सीटों पर ज्यादा नाम कटे, वहां BJP को ज्यादा फायदा मिला.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने TMC की दलीलों को सुनने के बाद पार्टी को नई याचिकाएं दायर करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर किसी को चुनाव नतीजों पर आपत्ति है तो उचित Election Petition के जरिए चुनौती दी जा सकती है. अब TMC इन 31 सीटों पर मतदाता सूची संशोधन और उसके नतीजों पर असर को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ सकती है.
अब आगे क्या हो सकत है?
यह फैसला TMC को कुछ कानूनी विकल्प देता है, लेकिन चुनाव नतीजे पहले ही घोषित हो चुके हैं. BJP ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है, जबकि TMC इसे प्रक्रिया की कमियों का मुद्दा बता रही है. चुनाव आयोग ने पहले ही SIR को साफ-सुथरी प्रक्रिया बताया था. कोई भी नया विवाद अंतिम फैसले तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरेगा. स्थिति पर नजर बनी रहेगी.