उत्तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-elections) की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन सभी दल तैयरियों में जुट गए हैं. इसी बीच दावा किया जा रहा है कि UP उपचुनाव को लेकर BJP अलग रणनिति के तहत काम कर रही है. अब सवाल ये है कि ऐसे दावे क्यों किए जा रहे हैं. दरअसल, इन 10 सीटों में से एक सीट मुरादाबाद की कुंदरकी भी है, जो जिया उर रहमान के इस्तीफे के बाद खाली हो गई, क्योंकि रहमान संभल लोकसभा सीट से सपा के सांसद बन गए हैं.
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खाली हुई इस सीट पर अब सपा और बीजेपी दोनों की नज़र है. इसी बीच खबर आ रही है कि इस सीट पर कब्ज़ा जमाने के लिए बीजेपी किसी मुस्लिम नेता को उतारने पर विचार कर रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल मुस्लिम नेता के नाम पर मंथन चल रहा है. राज्य नेतृत्व इस पर विचार करेगा. इसके बाद संभावित नामों का एक पैनल केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष विचार के लिए भेजा जाएगा.
जिन सीटों पर उपचुनाव होने हैं ये वो सीटें हैं जो या तो किसी विधायक के निधन से या फिर किसी विधायक के सांसद चुने जाने से खाली हुई हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के पास मौका है अपना संख्या बल बढ़ाने का. इसलिए दूसरे दलों के साथ-साथ बीजेपी जो राज्य की सत्ता में बैठी है वो भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने तो 16 मंत्रियों को मैदान में उतार दिया है.
इन तैयारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि बीजेपी मुस्लिम उम्मीदवार को उतारने जा रही है? ये बड़ी बात इसलिए है क्योंकि 2019 के बाद से यह पहला मौका होगा, जब यूपी में भाजपा किसी मुस्लिम नेता को टिकट देगी. इससे पहले मुख्तार अब्बास नकवी को पार्टी ने टिकट दिया था. वहीं 2024 के आम चुनाव में भाजपा ने यूपी समेत उत्तर भारत के किसी भी राज्य में मुस्लिम कैंडिडेट नहीं दिया था.
हालांकि केरल की मलप्पुरम लोकसभा सीट से कालिकट यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अब्दुल सलाम को उतारा गया था, जिन्हें हार मिली है. अब सवाल ये भी है कि बीजेपी ऐसा क्यों करेगी तो जानकारों का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में बीजपी को उत्तर प्रदेश में करारा झटका लगा है. इसलिए बीजेपी अब नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है.
UP में ऐसे नतीजे क्यों आए इसपर लगातार मंथन चल रहा है और समीक्षा बैठक हो रही हैं. बीजेपी समझ चुकी है कि एक समुदाय को पूरी तरह दरकिनार करना उसको भारी पड़ गया. शायद यही वजह है कि अब बीजेपी 2014 वाले पैटर्न पर वापस आ रही है और इसकी शुरुआत यूपी के विधानसभा उपचुनाव से कर रही है. हालांकि देखना होगा कि बीजेपी की ये कोशिश जनता को लुभा पाती है या नहीं? और विधानसभा उपचुनाव में जनता किसे समर्थन देती है.