इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी नाजुक शांति समझौते को तोड़ते हुए एक बार फिर महायुद्ध छिड़ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और देश में जारी भारी शोक के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कड़े आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा और विनाशकारी सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस महा-हमले के बाद जहां वाशिंगटन और ट्रम्प प्रशासन के इस कदम से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान में अंतिम संस्कार के बीच ही अमेरिका से बदला लेने की खाई गई कसमों से युद्ध की आग और भड़क गई है।
तेल टैंकरों पर हमले के जवाब में सेंटकॉम का महा-ऐक्शन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद कड़ा बयान जारी किया है। सेंटकॉम ने साफ किया है कि यू.एस. के ये भीषण हमले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे तेल टैंकरों और आम नागरिकों वाले तीन कमर्शियल जहाज़ों पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में हैं। सेंटकॉम के मुताबिक, ईरान लगातार शांत होने का नाम नहीं ले रहा था और उसकी यह आक्रामकता पूरी तरह से गैर-जरूरी और खतरनाक थी, जो कि दोनों देशों के बीच हुए सीधे युद्धविराम (Ceasefire) का खुला और स्पष्ट उल्लंघन है। अमेरिका ने दो टूक कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने की भारी कीमत ईरान को चुकानी होगी।
कई घंटों तक चलेगी बमबारी, मिसाइल साइट्स और पोर्ट फैसिलिटीज निशाने पर
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के सूत्रों के अनुसार, यह सैन्य ऑपरेशन काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है और इन हमलों के कई घंटों तक लगातार चलने की उम्मीद है। अमेरिकी लड़ाकू विमान और मिसाइलें इस वक्त ईरान के प्रमुख हथियार लॉन्च साइट्स, मिसाइल लॉन्च पैड्स, अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय सैन्य ठिकानों को मलबे में तब्दील कर रहे हैं। इसके साथ ही ईरान की कई महत्वपूर्ण पोर्ट फैसिलिटीज (बंदरगाह संपत्तियों) को भी सीधे निशाने पर लिया गया है ताकि ईरान की नौसैनिक आक्रामकता को पूरी तरह पंगु बनाया जा सके।
इधर अंतिम यात्रा में गूंजे बदले के नारे, लाल झंडे लहराकर दी चेतावनी
दूसरी तरफ, इन अमेरिकी हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान और पवित्र शहर कौम में अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान लाखों समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। खामेनेई की विदाई के समय जनसैलाब के बीच बदले के प्रतीक माने जाने वाले 'लाल झंडे' लहराए गए और पूरे माहौल में 'या लथारत अल-खामेनेई' (खामेनेई की हत्या का बदला लो) के गगनभेदी नारे गूंज उठे। पूरा ईरान इस वक्त अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लेने की मांग को लेकर उबल रहा है।
ईरानी नेताओं की दो टूक: हत्यारों का पीछा नहीं छोड़ेगी सेना
अमेरिकी बमबारी और जनता के भारी आक्रोश के बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अयातुल्ला खामेनेई की अंतिम यात्रा को केवल एक शोक सभा नहीं, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए संघर्ष और प्रतिरोध के रास्ते पर और अधिक मजबूती से चलने का एक महान संकल्प बताया है। वहीं, ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि सर्वोच्च नेता की हत्या की साजिश रचने और इसे अंजाम देने वालों का पीछा ईरानी सेना कभी नहीं छोड़ेगी और इसका अंजाम बहुत खौफनाक होगा। इस आर-पार की जंग के बाद अब पूरे मिडिल ईस्ट में फुल-स्केल वॉर छिड़ चुका है।