नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान को बड़ा तोहफा देते हुए उसके तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है. यह फैसला स्विट्जरलैंड में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के सकारात्मक नतीजों के बाद लिया गया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त 2026 तक मान्य रहने वाली इस छूट की घोषणा की है. इसके तहत ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल का उत्पादन, परिवहन और निर्यात बिना किसी अड़चन के कर सकेगा.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस फैसले को शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित पारगमन और IAEA निरीक्षकों को प्रवेश देने की प्रतिबद्धता जताई है.
भारत पर क्या होगा असर?
यह अस्थायी राहत भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर सकती हैं, जिससे भारत का तेल आयात बिल कम होगा. भारत अपनी 88% कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है. सस्ते तेल से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दबाव कम पड़ेगा और तेल कंपनियों को घाटे से कुछ राहत मिल सकती है.
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक निकट भविष्य में ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीद की संभावना कम है. केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी नीति में उतार-चढ़ाव के कारण भारत लंबे अनुबंध करने से बच सकता है.
भारत की रणनीति
भारत पहले से ही अपने तेल आयात स्रोतों को विविधीकरण दे रहा है. जून में रूस से आयात नया रिकॉर्ड बना सकता है (23 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक). इसके अलावा UAE, सऊदी अरब और वेनेजुएला जैसे देशों से भी आयात जारी है. अप्रैल में भी भारत ने कुछ वर्षों बाद ईरानी तेल खरीदा था, लेकिन इस बार तत्काल बड़े उछाल की उम्मीद नहीं है. यह 60 दिन की छूट भारत को सस्ता क्रूड देने का मौका दे सकती है, लेकिन लंबी अवधि की अनिश्चितता बनी हुई है. सरकार और रिफाइनरी कंपनियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.