लखनऊ : कानपुर के चर्चित बिकरू कांड के मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के करीब छह साल बाद अब उसका आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है. कानपुर नगर निगम के जोन-4 की ओर से 11 सितंबर 2026 को डेथ सर्टिफिकेट जारी किया गया. यानी 10 जुलाई 2020 को पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद करीब 2,256 दिन तक सरकारी दस्तावेजों में मृत्यु प्रमाण पत्र का मामला अटका रहा.
विकास दुबे की मौत 10 जुलाई 2020 को उस समय हुई थी, जब उज्जैन से कानपुर लाते वक्त पुलिस के मुताबिक वाहन पलटने के बाद उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया. इससे कुछ दिन पहले 2 जुलाई 2020 की रात बिकरू गांव में उसे गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर हमला हुआ था. इस घटना में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी. बिकरू कांड के बाद विकास दुबे और उसके कई साथियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई हुई.
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मुठभेड़ में मौत के बावजूद विकास दुबे का मृत्यु प्रमाण पत्र वर्षों तक जारी नहीं हो सका. इसकी मुख्य वजह उसके पिता के नाम को लेकर दस्तावेजों में हुई गलती बताई गई. पोस्टमार्टम से जुड़े रिकॉर्ड और बॉडी डिस्पोजल स्लिप में पिता का नाम ‘रामकुमार दुबे’ की जगह ‘राजकुमार दुबे’ दर्ज हो गया था. इसी त्रुटि के कारण डेथ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया अटक गई.
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने अधिकारियों से संपर्क किया. मामला लंबा खिंचने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पुराने रिकॉर्ड की जांच की. सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने पोस्टमार्टम हाउस जाकर दस्तावेजों की पड़ताल की, जिसके बाद रिकॉर्ड में जरूरी सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ी.
अब नगर निगम ने प्रमाण पत्र जारी कर उसे कोर्ट में दिए गए पते पर रजिस्टर्ड डाक से भेज दिया है, इसके साथ ही विकास दुबे की मौत का वह आधिकारिक दस्तावेज भी तैयार हो गया, जो छह साल से सरकारी रिकॉर्ड में लंबित था.