नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो सुर्खियों में आ गई हैं. गीतांजलि ने साफ कहा है कि अगर सोनम मार्च में शामिल नहीं हो सके तो वे खुद मार्च का नेतृत्व करेंगी.
गीतांजलि अंगमो कराटे ब्लैक बेल्ट धारक और ओडिसी व रूसी बैले की कुशल नृत्यांगना हैं. वे सामाजिक उद्यमी और शिक्षा क्षेत्र की कार्यकर्ता हैं. वे हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की सह-संस्थापक हैं, जो लद्दाख की कठिन परिस्थितियों में टिकाऊ विकास, सोलर हीटेड भवनों और ग्रीन कैंपस पर काम करता है.
ओडिशा के बालासोर में पंजाबी परिवार में जन्मी गीतांजलि ने फकीर मोहन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन और Xavier Institute of Management से MBA किया. उन्होंने 15 साल तक डेनमार्क में कॉर्पोरेट जॉब की, बाद में भारत लौटकर उद्यमिता शुरू की. वे Chevening Scholar हैं और Women Transforming India Award से सम्मानित हैं.
गीतांजलि सोनम वांगचुक की दूसरी पत्नी हैं. जब सोनम को NSA के तहत 5 महीने जेल में रखा गया था, तब गीतांजलि सुप्रीम कोर्ट गईं और राष्ट्रपति को पत्र लिखा. उनकी कोशिशों से सोनम की रिहाई हुई.
अब भूख हड़ताल के दौरान भी गीतांजलि सक्रिय हैं. उन्होंने अस्पताल में सोनम की स्थिति पर अपडेट देते हुए कहा कि वे 20 जुलाई को संसद मार्च का नेतृत्व करेंगी. गीतांजलि का सक्रिय रुख वांगचुक के आंदोलन को नई ऊर्जा दे रहा है. उनकी इस भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है.