Who will be the new president of UP BJP: यूपी बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा? इससे शुरुआती सस्पेंस अब हटने लगा है. खबर है कि यूपी बीजेपी की ओर से 6 नामों की लिस्ट दिल्ली भेजी गई है. हाईकमान के पास जो लिस्ट गई है, उसमें जाति कार्ड का विशेष ख्याल रखा गया है. पहले उन नामों की लिस्ट आपको दिखाते हैं, फिर ये भी बताते हैं कि योगी का पसंदीदा चेहरा कौन है, जो यूपी बीजेपी का अगला अध्यक्ष बन सकता है.
6 नामों में ब्राह्मण वर्ग से दो चेहरे पूर्व डिप्टी CM दिनेश शर्मा और बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी का नाम है, OBC वर्ग से योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह और मोदी सरकार में मंत्री बीएल वर्मा का नाम है, जबकि दलित वर्ग से पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया और मौजूदा MLC विद्यासागर सोनकर हैं.
चूंकि मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी जाट समुदाय से आते हैं, इसलिए इस बार रणनीति अलग बनाई जा रही है. एक तरफ अखिलेश की पीडीए वाली चुनौती है तो दूसरी तरफ ब्राह्मण समुदाय में भी नाराजगी देखी जा रही है. जिसे लेकर इस बात की चर्चा भी तेज हो चली है कि पूर्व डिप्टी सीएम जो दिनेश शर्मा जो योगी के साथ पिछली सरकार में काम कर चुके हैं और बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी जिनकी हाईकमान तक पकड़ अच्छी है. इनका नाम फाइनल हो सकता है.
हालांकि बीजेपी के सामने चुनौती ये भी है कि इसे पहले से ही सवर्णों की पार्टी कहकर प्रचारित किया जाता रहा है, और राहुल गांधी ओबीसी का मुद्दा लगातार उठा भी रहे हैं. साथ में चंद्रशेखऱ और मायावती दलित मुद्दे पर मुखर हैं, तो बीजेपी किस जाति के नेता को अध्यक्ष के तौर पर तवज्जो देती है.
ये निश्चित तौर पर कहना मुश्किल होगा. लेकिन बीते दिनों अचानक से योगी आदित्यनाथ ने जैसे दिल्ली का दौरा किया था, एक ही दिन में 3 घंटे के भीतर तीन बड़ी मुलाकातें की थीं. पहले पीएम मोदी से मिले, फिर जेपी नड्डा से और फिर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कई मुद्दों पर बात की. उसके बाद से ये साफ हो गया था कि यूपी बीजेपी अध्यक्ष को लेकर भी चर्चा हुई होगी और उसके बाद उनके वहां लौटते ही कुछ ही दिनों में अध्यक्ष पद के लिए 6 नामों का भेजा जाना ये इशारा करता है कि यूपी बीजेपी को जल्द ही नया अध्यक्ष मिलने वाला है.
नए अध्यक्ष के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
फिलहाल बीजेपी के भीतर ही एक नया वर्ग बनता दिख रहा है. चाहे वो कानपुर में योगी की मंत्री प्रतिभा शुक्ला और उनके पति अनिल शुक्ला के थाने में धरने पर बैठने का मामला हो, या फिर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के आरोप कि अधिकारी हमारी सुन नहीं रहे, कई सवाल खड़े करता है. इसके अलावा इटावा कथावाचक का मसला खड़ा होना, जिसके बाद कई रिपोर्ट में ये सवाल खड़े किए गए कि आखिर यूपी में ब्राह्मण बनाम यादव का संघर्ष कौन खड़ा करना चाहता है? सत्ता पक्ष के लिए कहीं से भी ठीक नजर नहीं आता.
ऐसे में यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के सामने चुनौतियां कईं होने वाली हैं, पर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कमान मिलेगी कैसे? जिन 6 नामों की लिस्ट दिल्ली भेजी गई है क्या उनमें से कोई चुना जाएगा या बीजेपी जैसा चौंकाने वाला फैसला अब तक लेती आई है, जिन नामों की चर्चा होती है, उन्हें न चुनकर किसी और को चुन लेती है, वैसा कुछ करने वाली है.
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