असीम मुनीर ने ईरान के नेताओं से मिलने के लिए कॉम्बैट ड्रेस क्यों पहनी, लेकिन JD वेंस से मिलने के लिए सूट?

Amanat Ansari 11 Apr 2026 03:50: PM 3 Mins
असीम मुनीर ने ईरान के नेताओं से मिलने के लिए कॉम्बैट ड्रेस क्यों पहनी, लेकिन JD वेंस से मिलने के लिए सूट?

इस्लामाबाद: पाकिस्तान पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं, क्योंकि ईरानी नेता और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD वेंस कर रहे थे इस्लामाबाद पहुंचे थे. दोनों पक्षों के बीच दो हफ्ते के नाजुक युद्धविराम के बाद ये अहम बातचीत होनी थी. लेकिन जिस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान गया, वो था पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नहीं, बल्कि असीम मुनीर ही दोनों प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत कर रहे थे.

पाकिस्तान के डी-फैक्टो रूलर माने जाने वाले मुनीर ने इस मौके को अपनी ताकत दिखाने का मंच बना दिया. खास तौर पर उनकी ड्रेसिंग पर सबकी नजर गई. जब 71 सदस्यीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलने गए, तो असीम मुनीर कॉम्बैट गियर में थे. कुछ घंटे बाद, जब JD वेंस रिनोवेटेड नूर खान एयर बेस पर पहुंचे, तब असीम मुनीर पूरी तरह सूट-बूट में थे.

असीम मुनीर की यूनिफॉर्म डिप्लोमेसी

ये नजारा भू-राजनीतिक Experts को हैरान कर गया. कई विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के लिए यह जानबूझकर दिया गया मैसेज था. भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल संजय मेस्टन ने कहा, "एक आर्मी ऑफिसर को विदेशी नेताओं का स्वागत करते समय हमेशा यूनिफॉर्म में होना चाहिए. लेकिन असीम मुनीर अमेरिकियों के साथ खुद को डिप्लोमैट दिखाना चाहते हैं और ईरान के साथ सैनिक. यही मैसेजिंग है. ये एक सीनियर आर्मी जनरल के लिए शोभा नहीं देता."

JD वेंस से मिलते वक्त काला सूट पहनकर मुनीर खुद को ज्यादा स्टेट्समैन के रूप में पेश करना चाह रहे थे. पहले भी जब वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे तब भी मुनीर सूट में ही थे.  डिफेंस एक्सपर्ट संदीप उन्नीथन ने कहा कि ईरान से मिलते वक्त कॉम्बैट यूनिफॉर्म चुनना जानबूझकर किया गया था. उन्होंने ईरान-पाकिस्तान के हालिया तनावों का जिक्र किया जब मिसाइल हमले और बॉर्डर पर झड़पें हुई थी.

उन्होंने कहा कि मुनीर ने सेरेमोनियल आर्मी यूनिफॉर्म नहीं, बल्कि कॉम्बैट ड्रेस पहनी. ये ईरान के सामने ताकत दिखाने के लिए था कि वे एक मिलिट्री लीडर के रूप में जा रहे हैं. ईरान और पाकिस्तान के बीच कुछ साल पहले मिसाइलों का आदान-प्रदान हुआ था. बॉर्डर पर तनाव भी रहा है. ये सब कैमरों के लिए था. ईरान और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के सालों में ये तनावपूर्ण हो गए थे.

2024 में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे, जिसमें जैश अल-अदल नामक संगठन को निशाना बनाया गया था. इसके कुछ दिन बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सैन्य हमले किए. दोनों देशों के बीच तनाव तब खत्म हुआ जब चीन ने हस्तक्षेप किया. उसके बाद से संबंध ठीक-ठाक नहीं रहे.

अमेरिका के लिए मैसेज

JD वेंस से मिलते वक्त सूट पहनकर मुनीर खुद को सिर्फ एक सैन्य नेता नहीं, बल्कि एक डिप्लोमैट के रूप में पेश करना चाह रहे थे. संदीप उन्नीथन ने कहा,
"ये साफ दिखाता है कि असीम मुनीर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं." एक और महत्वपूर्ण मैसेज ये था कि मुनीर पाकिस्तान में सत्ता के केंद्र में हैं. संदीप उन्नीथन ने कहा कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ का इतने बड़े स्तर के विदेशी मेहमानों का स्वागत करना असामान्य है.

रिटायर्ड मेजर जनरल संजय सोई ने कहा, "प्रोटोकॉल के हिसाब से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री को यह काम करना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार है. आर्मी चीफ सबको पीछे नहीं छोड़ सकता." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मिलिट्री ही सबसे ऊपर है. असीम मुनीर ने एक कदम और आगे बढ़कर हर अंतरराष्ट्रीय मामलों में खुद को पेश किया है. वे लाइमलाइट में रहना चाहते हैं. उन्हें पता है कि असली फैसला वे ही करते हैं और वे इसे साबित करना चाहते हैं.

ये नजारा पुराने पाकिस्तानी तानाशाहों- याह्या खान, जनरल जिया-उल-हक या परवेज मुशर्रफ के समय जैसा था, जब वे खुद विदेशी मेहमानों का स्वागत करते थे. पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की इस दोहरी व्यवस्था से अच्छी तरह वाकिफ है. उन्होंने JD वेंस द्वारा पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार की पीठ थपथपाने का जिक्र किया और कहा, "वेंस द्वारा इशाक डार की पीठ थपथपाना ये संदेश दे रहा था कि अमेरिका सिविलियन पक्ष को भी महत्व देता है."

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