दशकों बाद अंग्रेजों ने वसूला क्रिकेट का लगान! वर्ल्ड चैंपियन की इस हालत का कौन जिम्मेदार? जानिए शर्मनाक हार की 5 इनसाइड स्टोरी

Rahul Jadaun 12 Jul 2026 12:21: PM 3 Mins
दशकों बाद अंग्रेजों ने वसूला क्रिकेट का लगान! वर्ल्ड चैंपियन की इस हालत का कौन जिम्मेदार? जानिए शर्मनाक हार की 5 इनसाइड स्टोरी

स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड का दौरा बेहद निराशाजनक और किसी बड़े झटके से कम नहीं साबित हुआ है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया को पांच मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में 0-4 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। सीरीज का पहला मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था, जिसके बाद बाकी बचे चारों मैचों में मेजबान इंग्लैंड ने एकतरफा जीत दर्ज की। शनिवार को खेले गए अंतिम टी-20 मैच में भी भारतीय गेंदबाजों, बल्लेबाजों और फील्डर्स ने बेहद लचर प्रदर्शन किया। इस शर्मनाक हार के साथ ही कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारत लगातार 6 अंतरराष्ट्रीय मैच हार चुका है। इस सीरीज में मिली ऐतिहासिक हार के 5 सबसे बड़े कारण नीचे दिए गए हैं:

  1. बल्लेबाजों का गलत अप्रोच और 'वैभव सूर्यवंशी' फैक्टर

पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। पहले मैच में संजू सैमसन खेले, लेकिन अगले ही मैच में उन्हें ड्रॉप करके वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू करा दिया गया। दिग्गजों का मानना था कि इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के सामने उतारने से पहले वैभव को आयरलैंड दौरे पर आजमाना चाहिए था। इस फैसले से सीनियर बल्लेबाजों में इनसिक्योरिटी (असुरक्षा की भावना) पैदा हुई कि जो तेज नहीं खेलेगा, उसकी जगह वैभव आ जाएगा। नतीजतन संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन पहली गेंद से हावी होने के चक्कर में फ्लॉप रहे। बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के मौसम और परिस्थितियों को समझे बिना ग्राउंडेड शॉट्स की जगह हर गेंद पर बड़े हिट्स (मैक्सिमम) लगाने का प्रयास किया और ज्यादातर कैच आउट हुए।

  1. बैटिंग ऑर्डर में बेवजह और लगातार बदलाव

सीरीज में बल्लेबाजी क्रम के साथ लगातार खिलवाड़ किया गया। पहले मैच में संजू और अभिषेक ने ओपनिंग की, फिर अगले 3 मैचों में वैभव और अभिषेक ने कमान संभाली और आखिरी मैच में वैभव को ही ड्रॉप कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब टी-20 फॉर्मेट में तीसरे नंबर पर खेलते हुए लगातार 2 शतक लगाने वाले तिलक वर्मा को निचले क्रम में धकेल दिया गया, जहां उनका स्थान भी पक्का नहीं था और वे कभी 5वें तो कभी 6वें नंबर पर आए। यही हाल शिवम दुबे का रहा, जिन्हें कभी ऊपर तो कभी नीचे भेजा गया। हमारे ऑलराउंडर गेंद और बल्ले दोनों से फ्लॉप रहे।

  1. हर मैच के बाद गेंदबाजों को बदलना (मैनेजमेंट का कन्फ्यूजन)

प्लेइंग-11 में लगातार बदलाव दिखा रहा था कि टीम मैनेजमेंट गहरे दबाव में था। तेज गेंदबाज प्रिंस यादव, जिन्होंने आयरलैंड में अपने डेब्यू पर 3 विकेट चटकाए थे, उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में बेवजह बाहर कर दिया गया। वाशिंगटन सुंदर को कभी ड्रॉप किया गया, तो कभी वापस लाया गया। कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच की यह रणनीति पूरी तरह कन्फ्यूज दिखी, जबकि टीम को 5 प्रॉपर स्पेशलिस्ट गेंदबाजों के साथ उतरना चाहिए था।

  1. भारतीय स्पिनर्स का पूरी तरह फ्लॉप होना

इंग्लैंड की पिचों पर स्पिनर्स के लिए मदद मौजूद थी, जिसका सबूत यह है कि इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाजों ने सीरीज में 10 विकेट चटकाए। इसके विपरीत, भारतीय स्पिनर्स पूरी सीरीज में महज 3 विकेट ही ले सके। पांचवें टी-20 मैच में अक्षर पटेल ने अपने 4 ओवर के कोटे में बिना कोई विकेट लिए 63 रन लुटा दिए, जबकि वाशिंगटन सुंदर भी बेअसर साबित हुए।

  1. घटिया दर्जे की फील्डिंग और लचर बॉडी लैंग्वेज

दुनिया की नंबर-1 टी-20 टीम से जिस स्तर की फील्डिंग की उम्मीद की जाती है, भारतीय टीम उसके आस-पास भी नहीं दिखी। पूरी सीरीज में कई आसान कैच टपकाए गए और खराब मिस-फील्डिंग देखने को मिली। मैदान पर खिलाड़ियों में वह चुस्ती-फुर्ती और आक्रामकता गायब थी। टीम की बॉडी लैंग्वेज देखकर ऐसा लग रहा था कि मैच खत्म होने से पहले ही खिलाड़ियों ने मानसिक रूप से हार मान ली थी।

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