उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर जिले में एक लाख रुपये के इनामी गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ योगेश भदौड़ा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में नया विवाद खड़ा हो गया है। जिस दारोगा विक्रम राठौर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, उन्हें SSP ने लाइन हाजिर कर दिया है। अब पूरे घटनाक्रम और गिरफ्तारी की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
ऑपरेशन प्रहार के तहत हुई गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन प्रहार के तहत ITI थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए योगेश भदौड़ा को एक खंडहर के पास पिलखन के पेड़ के नीचे से गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से एक जंग लगा .315 बोर का देसी तमंचा और तीन कारतूस बरामद किए गए। पुलिस का दावा है कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
यूपी पुलिस भी रह गई हैरान
योगेश भदौड़ा लंबे समय से यूपी STF और कई जिलों की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। ऐसे में उत्तराखंड पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही यूपी पुलिस भी सक्रिय हो गई। बताया जा रहा है कि उसके खिलाफ मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बागपत और सहारनपुर समेत कई जिलों में करीब 46 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
कौन है योगेश भदौड़ा?
मेरठ के भदौड़ा गांव का रहने वाला योगेश मलिक उर्फ योगेश भदौड़ा यूपी पुलिस के टॉप-25 अपराधियों की सूची में शामिल रहा है। करीब 16 साल तक सिद्धार्थनगर जेल में रहने के बाद वह इसी साल जनवरी में रिहा हुआ था। इसके बाद वह उत्तराखंड के काशीपुर क्षेत्र में परिवार के साथ रहने लगा था। सहारनपुर के गंगोह थाने में दर्ज एक मामले में उसके फरार होने के बाद उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
SSP ने क्यों किया लाइन हाजिर?
गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला ऊधमसिंहनगर के SSP तक पहुंचा। इसके बाद बैठक बुलाकर दारोगा विक्रम राठौर और एक अन्य पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर दिया गया। पुलिस फिलहाल इस बात की जांच कर रही है कि गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया सही तरीके से अपनाई गई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आरोपी और पुलिसकर्मियों के बीच किसी प्रकार का कोई संबंध तो नहीं था।
1995 से शुरू हुआ अपराध का सफर
बताया जाता है कि योगेश भदौड़ा ने वर्ष 1995 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआती विवाद के बाद उसने कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया और धीरे-धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधियों में शामिल हो गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसने पहचान छिपाने के लिए कई बार नकली दाढ़ी, मूंछ, चश्मा और टोपी का भी इस्तेमाल किया।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। दारोगा विक्रम राठौर को लाइन हाजिर किए जाने के बाद अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में हुई और कहीं इस कार्रवाई में कोई लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।