कुशीनगर: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राचीन धार्मिक गौरव को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है. कुशीनगर जिले के फाजिलनगर कस्बे का नाम बदलकर पावागढ़ करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को तमकुही में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि फाजिलनगर अब पावागढ़ के नाम से जाना जाएगा. यह दूसरा मौका है जब सीएम योगी ने इस नाम परिवर्तन की बात कही है.
बौद्ध और जैन परंपरा से गहरा नाता
फाजिलनगर का नाम सिर्फ एक कस्बे तक सीमित नहीं है. यह जगह भगवान गौतम बुद्ध और भगवान महावीर स्वामी दोनों की जीवन-लीला से जुड़ी हुई है. बौद्ध इतिहास के अनुसार, भगवान बुद्ध जब बिहार से कुशीनगर (प्राचीन कुशीनारा) की ओर जा रहे थे, तो उन्होंने फाजिलनगर के निकट चेतीग्राम (आज का सठियांव) में रात्रि विश्राम किया था.
यहीं उनके अंतिम भोजन के रूप में सुकर मांस परोसा गया, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी. इसके कुछ ही समय बाद वे कुशीनगर पहुंचे और महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए. जैन परंपरा के अनुसार, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने पावा (आज का फाजिलनगर) में अपने अंतिम उपदेश दिए और यहीं परिनिर्वाण प्राप्त किया. पावा मल्ल राजाओं की दूसरी राजधानी थी, जबकि पहली राजधानी कुशीनारा (कुशीनगर) थी.
इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार इस प्राचीन नाम को पुनर्जीवित करना चाहती है. क्षेत्र में बौद्ध कालीन कई टीले मौजूद हैं, जिनकी खुदाई में प्राचीन अवशेष मिल चुके हैं. स्थानीय जैन समुदाय भी लंबे समय से इस जगह को महावीर स्वामी से जोड़कर देखता आया है.
यही वजह है कि यहां का इंटर कॉलेज पहले से ही 'पावानगर महावीर इंटर कॉलेज' नाम से जाना जाता है. सरकार का मानना है कि नाम बदलने से इस क्षेत्र का धार्मिक और पर्यटन महत्व बढ़ेगा, खासकर बौद्ध और जैन तीर्थयात्रियों के लिए.