बलिया में पुलिस पर गुंडई का आरोप, दलित को थाने में पीट-पीट कर मार डाला! सड़क पर उतरी जनता ने मचाया बवाल

Rahul Jadaun 12 Jul 2026 05:04: PM 3 Mins
बलिया में पुलिस पर गुंडई का आरोप, दलित को थाने में पीट-पीट कर मार डाला! सड़क पर उतरी जनता ने मचाया बवाल

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से खाकी को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां रेवती थाने के अंदर पुलिस की बर्बरता यानी ‘थर्ड डिग्री’ के बाद एक दलित शख्स की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया. रविवार सुबह गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया. चौतरफा दबाव और बवाल बढ़ता देख आखिरकार पुलिस बैकफुट पर आई और आरोपी दरोगा, सिपाही तथा ग्राम प्रधान समेत 6 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है.

वाराणसी में इलाज के दौरान तोड़ा दम, सुबह शव पहुंचते ही भड़का गुस्सा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक कामजी गोंड का शव शनिवार की देर रात जब पोस्टमार्टम के बाद उनके गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया. पुलिस की कथित बेरहमी से नाराज परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा रविवार सुबह फूट पड़ा. इंसाफ और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लोगों ने गायघाट के खेदू चौराहा पर शव रखकर धरना शुरू कर दिया, जिससे सड़क पूरी तरह जाम हो गई. लगभग एक घंटे तक चले इस चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं.

जाम की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल पहुंचा. सीओ बैरिया आलोक गुप्ता और कई थानों की फोर्स ने मोर्चा संभाला. इस दौरान जाम में एक एम्बुलेंस भी फंस गई थी, जिसे देखते हुए अधिकारियों ने ग्रामीणों को काफी समझाया-बुझाया और किसी तरह जाम को खुलवाया.

प्रशासन के साथ दो घंटे चली वार्ता, फिर दर्ज हुई FIR

सड़क जाम की खबर मिलते ही पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान और निषाद पार्टी के बांसडीह नेता कनक पांडेय भी मौके पर पहुंच गए. इसके बाद एसडीएम बांसडीह अभिषेक प्रियदर्शी और सीओ आलोक गुप्ता ने मृतक के परिजनों के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की. प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद मृतक के बेटे विशाल ने पुलिस को लिखित तहरीर दी. तहरीर के आधार पर पुलिस ने इस मामले में कुल 6 लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज की है. आरोपियों में उपनिरीक्षक (दरोगा) सचिन सरोज, कांस्टेबल (सिपाही) अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह उर्फ लालू, ड्राइवर मनीष यादव, सूरज कनौजिया और सूरज कनौजिया का एक अज्ञात रिश्तेदार शामिल हैं. मुकदमा दर्ज होने के बाद दोपहर में परिजन शांत हुए और शव को अंतिम संस्कार के लिए हुकुमछपरा गंगा घाट ले गए.

बेटे का आरोप: थाने में बेरहमी से पीटा, फिर अचेत अवस्था में रास्ते पर फेंका

मृतक के बेटे विशाल ने पुलिस को दी तहरीर में पूरी आपबीती बताई है. विशाल के मुताबिक, 7 जुलाई को गांव के दो पक्षों में कुछ विवाद हुआ था. इसी सिलसिले में पूछताछ के नाम पर 8 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे दो पुलिस कांस्टेबल मेरे पिता कामजी गोंड को जबरन थाने ले गए. थाने में पूछताछ के बहाने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई. पिटाई के बाद शाम 4 बजे उन्हें घर पहुंचाने के बजाय, हमारे विरोधी पक्ष की पैरवी कर रहे ग्राम प्रधान लालू सिंह और उनके ड्राइवर मनीष यादव के हवाले कर दिया गया.

विशाल ने आगे बताया कि शाम करीब 6 बजे उनके घर से कुछ दूरी पर ‘ठगनी माई के डेरा’ के पास उनके पिता बेहोश और मरणासन्न हालत में पड़े मिले. वहां खेल रहे बच्चों ने इसकी जानकारी परिवार को दी. परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और चोटों से कराह रहे अचेत पिता को घर लेकर आए.

इलाज के दौरान मौत, रास्ते में पुलिस पर बदसलूकी का भी आरोप

परिजनों ने दो दिनों तक घर पर ही उनका इलाज कराया, लेकिन जब 10 जुलाई की सुबह उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई, तो उन्हें आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवती में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पहले बलिया जिला अस्पताल और फिर वहां से वाराणसी के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया. वाराणसी में इलाज के दौरान 10 जुलाई की रात करीब 10 बजे कामजी गोंड ने दम तोड़ दिया. बेटे विशाल का यह भी आरोप है कि 11 जुलाई की रात जब वे वाराणसी से पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर घर लौट रहे थे, तो सुखपुरा के पास पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी और दुर्व्यवहार भी किया.

घटना की गंभीरता को देखते हुए रविवार को एडिशनल एसपी संजय वर्मा और विधायक प्रतिनिधि विश्राम सिंह भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से घटना से जुड़ी हर एक जानकारी ली और ढांढस बंधाया. अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा है.

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