गाजीपुर: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के बहुचर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। सपा शासनकाल को गुंडाराज का प्रतीक बताते हुए ओपी राजभर ने इसके फुल फॉर्म को ही पूरी तरह बदल दिया। गाजीपुर के शेखपुर गांव में आयोजित एक 'पौधरोपण महायज्ञ' कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राजभर ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "अखिलेश यादव के पीडीए का असली मतलब है— पीट देगा अहीर, पीट देगा अल्पसंख्यक।" उन्होंने दावा किया कि वास्तविक पीडीए तो इस समय एनडीए (NDA) गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा है।
राम मंदिर और सपा के बजट पर उठाए सवाल
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे की चोरी से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कांग्रेस और सपा दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को तो खुश होना चाहिए कि राम मंदिर का ताला उनके कार्यकाल में खुला था, और अब एनडीए ने भव्य मंदिर का निर्माण करवा दिया है। विपक्षियों को इन तमाम पचड़ों और बयानों से दूर रहकर सीधे अयोध्या जाकर प्रभु राम के दर्शन-पूजन करने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सपा पर तुष्टीकरण का गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सरकारी पैसा केवल मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर ही खर्च किया जा रहा था।
अखिलेश से फोटो खिंचाने के लगते हैं पैसे: राजभर का बड़ा आरोप
पूर्व के गठबंधन का जिक्र करते हुए राजभर ने तंज कसा और कहा, "अखिलेश जी ने हमें तलाक दिया, जिसे हमने सहर्ष कबूल कर लिया। अब सुबह-सुबह अगर उनकी फोटो सामने आ जाए, तो गुस्सा आना तो स्वाभाविक है।" राजभर ने एक बेहद चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि सपा के कुछ जमीनी और कमजोर कार्यकर्ताओं ने ही उन्हें यह राज बताया है कि अखिलेश यादव से मुलाकात करने, उनसे हाथ मिलाने या उनके साथ एक तस्वीर (फोटो) खिंचाने के लिए बकायदा पैसे देने पड़ते हैं।
जन्मदिन पर दी थी 'आरामतलबी' छोड़ने की मुफ्त सलाह
सपा के साथ पिछला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने वाले ओपी राजभर इन दिनों अखिलेश यादव को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इससे पहले अखिलेश यादव के जन्मदिन पर भी उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा था। राजभर ने लिखा था कि एक बड़े घराने के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री को वे उपहार में क्या ही दे सकते हैं, इसलिए उम्र में बड़ा होने के नाते वे एक बेशकीमती मशविरा दे रहे हैं।
राजभर ने अखिलेश को सलाह देते हुए कहा था कि वे अपनी वातानुकूलित (एसी) और प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) वाली आरामतलबी की राजनीति को छोड़कर तुरंत बाहर आएं। वे गांव-देहात की पगडंडियों को नापें और गैर-यादव पिछड़ों, दलितों, शोषितों और समाज के गरीब तबके के बीच जाकर उनके सुख-दुख में भागीदारी निभाएं, तभी वे नए उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत को समझ पाएंगे।