यूपी में पहली बार बन रहा डबल डेकर रोड, ग्रेटर नोएडा वेस्ट को CM योगी ने दी 900 करोड़ की सौगात

Rahul Jadaun 12 Jul 2026 07:56: PM 2 Mins
यूपी में पहली बार बन रहा डबल डेकर रोड, ग्रेटर नोएडा वेस्ट को CM योगी ने दी 900 करोड़ की सौगात

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा वेस्ट (ग्रेनो वेस्ट) में गगनचुंबी इमारतों के बीच रहने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस क्षेत्र को करीब 900 करोड़ रुपये की भव्य विकास परियोजना की सौगात मिली है। सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो कनेक्टिविटी की कमी के कारण अब तक इस इलाके के नागरिकों को दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम आने-जाने के लिए पूरी तरह अपने निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे वे रोजाना घंटों भीषण ट्रैफिक जाम से जूझते थे। लेकिन अब उत्तर प्रदेश की पहली डबल डेकर एलिवेटेड सड़क बनने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे यह सफर मिनटों में तय हो सकेगा।

चार बड़ी एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से पूरा होगा ड्रीम प्रोजेक्ट

इस ढाई किलोमीटर लंबे ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, नोएडा अथॉरिटी, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाथ मिलाया है। यह आधुनिक कॉरिडोर 130 मीटर चौड़ी सड़क से शुरू होकर क्रॉसिंग रिपब्लिक के रास्ते सीधे नेशनल हाईवे-9 (NH-9)  जोड़ेगा।

3-3 लेन के दो अलग-अलग एलिवेटेड स्तर होंगे तैयार

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वर्तमान में जमीन पर चल रही सड़क स्थानीय निवासियों के लिए यथावत खुली रहेगी। इसके ठीक ऊपर दो नए एलिवेटेड स्तर (लेयर्स) तैयार किए जाएंगे। दोनों ही ऊपरी मंजिलों की चौड़ाई लगभग 9 से 10 मीटर होगी। प्रत्येक लेयर पर 3-3 लेन बनाई जाएंगी, जो पूरी तरह 'वन वे' ट्रैफिक के लिए आरक्षित होंगी। शुरुआत में इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन था, जो अब संशोधित होकर करीब 900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह संपूर्ण उत्तर प्रदेश का पहला डबल डेकर एलिवेटेड रोड होगा।

एक लाख से अधिक चालकों का बचेगा समय, यू-शेप डिजाइन से बचेगी जगह

इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के पूरा होने के बाद रोजाना नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली की तरफ आवागमन करने वाले एक लाख से अधिक वाहन चालकों को जाम से परमानेंट आजादी मिल जाएगी। अभी पीक आवर्स के दौरान 130 मीटर रोड और क्रॉसिंग रिपब्लिक मार्ग पर वाहनों के रेंगने से न केवल आम जनता बल्कि मालवाहक गाड़ियां भी फंसी रहती थीं।

प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर (जीएम) एके सिंह ने तकनीकी बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि सामान्य एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए कम से कम 15 मीटर खुली जमीन की आवश्यकता होती है, जबकि मौके पर केवल 14 मीटर जगह ही उपलब्ध थी। इसी अड़चन को दूर करने के लिए कंसल्टेंट की मदद से डबल डेकर डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया। इस अनूठे डिजाइन में 'यू-शेप पीयर' (फ्लाईओवर पिलर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे महज 12 मीटर के दायरे में ही छह लेन का ट्रैफिक सुचारू रूप से निकाला जा सकेगा। इसके चलते नीचे की मौजूदा सड़क का उपयोग स्थानीय सोसायटियों, गांवों और बाजारों के लोग पहले की तरह सर्विस लेन के रूप में आसानी से कर सकेंगे। एनएचएआई ने अब इस पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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