मुंबई: बंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस्लाम धर्म अपनाने के बाद SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते. कोर्ट ने इसी आधार पर एक दंपति को इस एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया. न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने खुद बयान दिया था कि उसने शादी के समय इस्लाम धर्म अपनाया था और तब से मुस्लिम धर्म का पालन कर रही है.
उसने अपना नाम भी बदल लिया था. शिकायतकर्ता महिला मूल रूप से हिंदू महार समुदाय (SC) से थी, लेकिन 2011 में मुस्लिम युवक से शादी कर इस्लाम अपनाया. संपत्ति विवाद में परिवार के सदस्यों (ननद और ननदोई) के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई. महिला ने आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान जातिसूचक गालियां दी गईं और मारपीट की गई.
कोर्ट ने कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता ने इस्लाम अपनाया है, इसलिए SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते. हालांकि, IPC की अन्य धाराओं के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है. वकील सत्यव्रत जोशी ने दलील दी कि यह परिवार के अंदर का सिविल विवाद है और SC/ST एक्ट का दुरुपयोग किया गया है. यह फैसला धर्मांतरण और आरक्षण/सुरक्षा कानूनों के दायरे को लेकर अहम माना जा रहा है.